
गोपेश्वर (चमोली): उत्तराखंड की प्रसिद्ध पंचकेदार यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव आज पूरा हुआ। चमोली जिले के पौराणिक गोपीनाथ मंदिर से आज 17 मई को भगवान रुद्रनाथ की पवित्र डोली वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ अपने शीतकालीन प्रवास से कैलाश रुद्रनाथ धाम के लिए रवाना हुई।
‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंजा गोपेश्वर
सुबह से ही गोपीनाथ मंदिर परिसर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान रुद्रनाथ के दर्शन करने और पवित्र डोली को कंधा देने के लिए श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह दिखा। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और सेना के बैंड की धुनों पर भक्त झूमते-गाते नजर आए। डोली प्रस्थान के समय भक्तों की आंखें श्रद्धा से नम थीं, जबकि पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। रवानगी से पूर्व आज तड़के भगवान रुद्रनाथ के विग्रह का विशेष जलाभिषेक और भव्य श्रृंगार किया गया।
दुर्गम रास्तों से होकर पहुंचेगी डोली
धार्मिक मान्यताओं और परंपरा के अनुसार, भगवान की डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए दुर्गम और अत्यंत सुंदर बुग्यालों के बीच से होकर गुजरेगी। रास्ते में पड़ने वाले गांवों के ग्रामीणों ने डोली पर फूल-अक्षत बरसाकर भगवान का आशीर्वाद लिया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
कल खुलेंगे कपाट, शुरू होगी ग्रीष्मकालीन पूजा
समुद्र तल से लगभग 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर के कपाट कल 18 मई की सुबह 11 बजे ग्रीष्मकाल के लिए विधिवत रूप से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित इस पावन तीर्थ में ग्रीष्मकालीन पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। रुद्रनाथ धाम में भगवान शिव के ‘एकानन’ (मुख) के दर्शन होते हैं।
यह यात्रा उत्तराखंड की सबसे कठिन और रोमांचक ट्रेकिंग यात्राओं में से एक मानी जाती है। मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
