UTTARAKHAND

टिहरी झील रिंग रोड: 1200 करोड़ के प्रोजेक्ट पर गहराया संकट, ग्रामीणों ने जमीन देने से किया इनकार

नई टिहरी: विश्व प्रसिद्ध टिहरी झील के चारों तरफ प्रस्तावित 1200 करोड़ रुपए की लागत वाली रिंग रोड (Ring Road) परियोजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है। इस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। ‘रिंग रोड संघर्ष समिति’ के बैनर तले एक दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने रौलाकोट स्थित भामेश्वर महादेव मंदिर में बैठक कर शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

क्या है ग्रामीणों की नाराजगी?
बैठक में आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन रिंग रोड चौड़ीकरण के नाम पर उनकी अनुमति के बिना जमीनों और मकानों का अधिग्रहण कर रहा है। उनका कहना है कि मुआवजे के निर्धारण में उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है और दोहरे मानक अपनाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याएं नहीं सुलझीं, तो वे एक इंच भी जमीन नहीं देंगे, भले ही इससे प्रोजेक्ट रुक जाए।

ग्रामीणों की प्रमुख 4 मांगें:
रिंग रोड संघर्ष समिति ने प्रशासन के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं:

  1. समान मुआवजा: सड़क के मुआवजे को लेकर दोहरे मानक न अपनाए जाएं। राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) की तर्ज पर सभी को एक समान भुगतान किया जाए।
  2. एलाइनमेंट में बदलाव: कई जगहों पर सड़क का एलाइनमेंट (नक्शा) बदला जाए ताकि आबादी प्रभावित न हो।
  3. विकास कार्य: जिन गांवों की जमीनें अधिग्रहित की जा रही हैं, विकास कार्य और सौंदर्यीकरण उन्हीं गांवों के आसपास हो, न कि उन जगहों पर जहां जमीन नहीं ली गई है।
  4. सड़क चौड़ीकरण: सड़क चौड़ीकरण के मानकों में शिथिलता बरती जाए।

वार्ता की मांग और उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने मांग की है कि पीडब्ल्यूडी, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से समिति के साथ बैठक करें। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अधिकारियों ने संवाद नहीं किया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे और निर्माण कार्य नहीं होने देंगे।

क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?

  • पर्यटन विभाग: अधिकारी आशीष कठैत ने बताया कि रिंग रोड का कार्य चल रहा है, लेकिन सड़क चौड़ीकरण और मुआवजे का पूरा जिम्मा लोक निर्माण विभाग (PWD) के पास है।
  • लोक निर्माण विभाग: अधिशासी अभियंता योगेश कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ग्रामीणों की संपत्ति का मुआवजा सर्किल रेट के आधार पर ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट अंतिम चरण में है, यदि कहीं विशिष्ट समस्या है तो ग्रामीणों के साथ वार्ता कर समाधान निकाला जाएगा।
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