देहरादून। केंद्र सरकार द्वारा देश में जनगणना की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद उत्तराखंड में भी प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई है। जनगणना के नियमों के तहत अधिसूचना जारी होते ही राज्य की भौगोलिक और प्रशासनिक सीमाएं तत्काल प्रभाव से ‘फ्रीज’ (सील) कर दी गई हैं। अब जनगणना का कार्य पूर्ण होने तक राज्य में किसी भी नए जिले, तहसील या नगर निकाय का गठन नहीं किया जा सकेगा।
जनगणना के कड़े नियमों (नियम 10) के अनुसार, एक बार अधिसूचना जारी होने के बाद किसी भी राज्य की सीमाओं में बदलाव करना प्रतिबंधित हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि उत्तराखंड सरकार अब जनगणना पूरी होने तक न तो किसी नई तहसील या जिले की घोषणा कर सकेगी और न ही नगर निगमों, नगर पालिकाओं या पंचायतों के वार्डों की सीमाओं में फेरबदल किया जा सकेगा। यह रोक इसलिए लगाई गई है ताकि आंकड़ों के संकलन और विश्लेषण में कोई विसंगति न आए।
राज्य की भौगोलिक विषमताओं और पहाड़ों में होने वाली बर्फबारी को देखते हुए उत्तराखंड में जनगणना का कार्य तीन अलग-अलग चरणों में संपन्न कराया जाएगा:
जनगणना को त्रुटिहीन बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। 16 फरवरी से राज्य में बहुस्तरीय प्रशिक्षण शुरू होगा:
यह जनगणना केवल लोगों की गिनती मात्र नहीं है, बल्कि अगले 10-15 वर्षों के लिए उत्तराखंड के विकास का खाका इसी डेटा पर आधारित होगा। संसाधनों का वितरण, सरकारी योजनाएं, निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation) और नीतिगत फैसले इन्हीं सटीक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे। राज्य प्रशासन ने प्रत्येक नागरिक का विवरण पारदर्शिता और वैज्ञानिक तरीके से दर्ज करने के लिए कमर कस ली है।
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