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महाशिवरात्रि पर गूंजेगा नया जयघोष! केदारनाथ के 325वें रावल नामित, सदियों पुरानी परंपरा की बढ़ेगी शान

रुद्रप्रयाग/नांदेड़। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख भगवान केदारनाथ धाम की सदियों पुरानी ‘रावल’ परंपरा में एक ऐतिहासिक परिवर्तन होने जा रहा है। महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित भीमाशंकर मठ में आयोजित आठ दिवसीय विश्व शांति यज्ञ के समापन पर, केदारपीठ के वर्तमान 324वें जगद्गुरु रावल भीमाशंकर लिंग शिवाचार्य महाराज ने अपने उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा कर दी है।

स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ेंगे भीमाशंकर लिंग महाराज

70 वर्षीय जगद्गुरु रावल भीमाशंकर लिंग ने गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पद से विराम लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने भावुक संबोधन में कहा कि पीठ की गरिमा और परंपरा की निरंतरता बनाए रखना उनका परम कर्तव्य है। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने योग्य शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग महाराज (केदार लिंग) को केदारपीठ का नया जगद्गुरु रावल नामित किया है। नांदेड़ में आयोजित समारोह में नए उत्तराधिकारी को विधिवत दीक्षा प्रदान की गई।

महाशिवरात्रि पर ओंकारेश्वर मंदिर में होगी औपचारिक घोषणा

नए रावल के चयन की औपचारिक पुष्टि आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर की जाएगी। यह कार्यक्रम पंचकेदारों की गद्दीस्थली ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में संपन्न होगा। इस अवसर पर मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ-साथ केदारघाटी के प्रमुख हक-हकूकधारी, दस्तूरधारी और विभिन्न गांवों (डंगवाड़ी, भटवाड़ी, चुनी-मंगोली आदि) के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।

वीरशैव परंपरा और पट्टाभिषेक की प्रक्रिया

केदारनाथ धाम की पूजा पद्धति दक्षिण भारतीय वीरशैव (लिंगायत) संप्रदाय के अंतर्गत आती है। परंपरा के अनुसार:

  • अविवाहित और शिव उपासक: केदारनाथ के रावल हमेशा अविवाहित होते हैं और मूल रूप से कर्नाटक के वीरशैव संप्रदाय से संबंध रखते हैं।
  • पट्टाभिषेक: आगामी चारधाम यात्रा के समापन और केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद, वीरशैव संप्रदाय के पांचों पीठों के पंचाचार्यों की उपस्थिति में 325वें जगद्गुरु के रूप में केदार लिंग का भव्य पट्टाभिषेक समारोह आयोजित किया जाएगा।

400 वर्षों का गौरवशाली इतिहास

केदारनाथ धाम में रावल परंपरा पिछले 400 से अधिक वर्षों से अनवरत चली आ रही है। इस परंपरा की शुरुआत भुकुंड लिंग महाराज से हुई थी, जो केदारनाथ के पहले रावल थे। वर्तमान रावल भीमाशंकर लिंग इस कड़ी में 324वें स्थान पर हैं। रावल केवल मुख्य पुजारी नहीं होते, बल्कि वे धाम की समस्त धार्मिक मर्यादाओं और अनुष्ठानों के सर्वोच्च संरक्षक होते हैं।

श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

महाशिवरात्रि के अवसर पर नए रावल की घोषणा को लेकर केदारघाटी के स्थानीय निवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। शिवाचार्य शांति लिंग (केदार लिंग) पिछले कई वर्षों से रावल भीमाशंकर लिंग के सान्निध्य में रहकर गुप्त काशी और केदारपीठ की पूजा-अर्चना का गहन प्रशिक्षण ले रहे हैं। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में केदारपीठ की आध्यात्मिक आभा और अधिक सुदृढ़ होगी।

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