देहरादून | देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध चारधामों में प्रवेश को लेकर लिए गए मंदिर समितियों के फैसलों ने राज्य में नई सियासी और सामाजिक बहस छेड़ दी है। बदरी-केदार के बाद अब गंगोत्री मंदिर समिति ने भी गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई गैर-सनातनी गंगोत्री धाम में प्रवेश करना चाहता है, तो उसे ‘पंचगव्य’ का पान करना होगा।
गंगोत्री मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि धाम की पवित्रता बनाए रखने के लिए गैर-सनातनियों के लिए विशेष शर्तें तय की गई हैं।
इससे पहले बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने भी इसी तरह का सख्त रुख अपनाया था। वहां नियम बनाया गया है कि अगर कोई गैर-सनातनी दर्शन करना चाहता है, तो उसे एक शपथ पत्र (Affidavit) देना होगा। इसमें उसे अपनी आस्था और मंदिर के नियमों के पालन की लिखित प्रतिबद्धता जतानी होगी।
मंदिर समितियों के इन फैसलों पर उत्तराखंड की राजनीति दो फाड़ हो गई है:
1. कांग्रेस: ‘यह चुनावी एजेंडा है’
विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे समाज में विभाजन पैदा करने वाला कदम बताया है। नेताओं का कहना है कि:
2. भाजपा: ‘मर्यादा और रील संस्कृति पर रोक जरूरी’
सत्ताधारी दल भाजपा के विधायक विनोद चमोली ने इस मुद्दे पर सधा हुआ बयान दिया है। उन्होंने कहा:
उत्तराखंड के चारों धाम (बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। हर साल यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
आगे क्या: अब देखना यह होगा कि क्या ये नियम स्थायी रूप से लागू रहेंगे या बढ़ते विरोध के बीच सरकार और प्रशासन इसमें कोई हस्तक्षेप करेगा। फिलहाल, ‘पंचगव्य’ और ‘एफिडेविट’ के इन फैसलों ने चारधाम यात्रा के आगामी सीजन से पहले माहौल गरमा दिया है।
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