
देहरादून |उत्तराखंड में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने के लिए धामी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। शासन ने प्रदेश के तीनों प्रमुख ऊर्जा निगमों की सेवाओं को ‘अत्यावश्यक सेवा’ घोषित करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों की किसी भी प्रकार की हड़ताल पर अगले 6 महीने के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
शासन की ओर से जारी अधिसूचना के तहत यह रोक तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
किन निगमों पर लागू हुआ प्रतिबंध?
शासन के आदेश के अनुसार, राज्य के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े तीनों प्रमुख निगमों के सभी संवर्गों (अधिकारी व कर्मचारी) पर यह नियम लागू रहेगा:
- UJVNL: उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (बिजली उत्पादन)
- UPCL: उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बिजली वितरण)
- PTCUL: पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (बिजली पारेषण)
फैसले की वजह: जनता और उद्योगों को मिले 24 घंटे निर्बाध बिजली
प्रमुख सचिव (ऊर्जा) आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि लोकहित को सर्वोपरि रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
- उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित: राज्य में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और सप्लाई चेन बिना किसी रुकावट के चलती रहे, ताकि घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।
- अधिनियम के तहत कार्रवाई: राज्य सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम 1966’ (उत्तराखंड में यथा प्रवृत्त) की धारा-3 की उपधारा (1) के तहत राज्यपाल के अनुमोदन से यह आदेश जारी किया है।
30 जुलाई को ही प्रदेशभर में लागू हुआ था एस्मा
बता दें कि इससे पहले बीती 30 जुलाई को भी धामी सरकार ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदेश के सभी राज्य कर्मचारियों के लिए 6 महीने तक एस्मा (ESMA) लागू कर हड़ताल पर रोक लगाई थी। कार्मिक विभाग द्वारा जारी उस आदेश के तहत सरकारी कर्मचारी अपनी किसी भी मांग को लेकर हड़ताल पर नहीं जा सकते हैं। अब ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी अलग से यह सख्त कदम उठाया गया है।
