देहरादून: उत्तराखंड में आगामी त्योहारी सीजन से पहले मिलावटखोरों और नकली दुग्ध उत्पाद बेचने वालों पर खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कड़ा प्रहार शुरू कर दिया है। प्रदेश में अमानकीकृत डेयरी एनालॉग (केमिकल व वनस्पति तेल से बना नकली पनीर/दूध) और गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
आदेश जारी होने के बाद से अब तक प्रदेश भर के 88 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर सैंपल सील किए गए हैं, जबकि नियमों की अनदेखी करने वाली 10 से अधिक दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है।
उत्तराखंड में त्योहारों के दौरान दूध और पनीर की खपत अचानक कई गुना बढ़ जाती है, जबकि स्थानीय उत्पादन सीमित है। इसी का फायदा उठाकर बाहरी राज्यों से बड़े पैमाने पर नकली व एनालॉग पनीर सप्लाई किया जाता है।
स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक इस मिलावट को रोकने के लिए एफडीए के आयुक्त विनय शंकर पांडे ने 7 अगस्त को सख्त प्रतिबंध का आदेश जारी किया था। इसके बाद विभाग की टीमों ने छोटे-बड़े सभी खाद्य प्रतिष्ठानों की चेकिंग तेज कर दी है।
एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि विभाग अब केवल मौके से माल नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को तोड़ा जा रहा है।
“एनालॉग पनीर दूध से नहीं बनता, जिससे इसके सेवन से गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। हमने पड़ोसी राज्यों से संपर्क साधा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली उत्पाद कहां से सप्लाई हो रहे हैं और राज्य में किस-किस डीलर तक पहुंचे हैं। मिलावट के इस नेटवर्क में शामिल लोगों के खिलाफ सीधे सीजेएम (CJM) कोर्ट में मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं।”— ताजबर सिंह जग्गी, अपर आयुक्त (FDA उत्तराखंड)
अपर आयुक्त ने बताया कि पहले नमूनों की जांच रिपोर्ट आने में काफी वक्त लगता था, जिससे मिलावटखोर बच निकलते थे। लेकिन अब व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है:
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