देहरादून: उत्तराखंड सरकार राज्य की संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, जिसके तहत राज्य की बोलियों, लोककथाओं, लोकगीतों और साहित्य के डिजिटलीकरण का कार्य किया जाएगा. इसके लिए एक ई-लाइब्रेरी भी बनाई जाएगी, जिसमें लोक कथाओं पर आधारित संग्रह बढ़ाने के साथ ही उन पर ऑडियो-विजुअल भी तैयार किए जाएंगे. स्कूलों में हर हफ्ते स्थानीय बोली-भाषा पर भाषण, निबंध और अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा. एक बड़े स्तर पर उत्तराखंड भाषा और साहित्य महोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें देशभर के साहित्यकारों को आमंत्रित किया जाएगा. राज्य सरकार ने उत्तराखंड की बोलियों का एक भाषाई मानचित्र बनाने का भी निर्णय लिया है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में उत्तराखंड भाषा संस्थान की साधारण सभा एवं प्रबंध कार्यकारिणी समिति की बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:
बैठक के दौरान भाषा मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि पिछले तीन सालों में उत्तराखंड में भाषा संस्थान द्वारा कई नई पहल की गई हैं. भाषाओं के संरक्षण और संवर्द्धन के साथ ही स्थानीय बोलियों को बढ़ावा देने के प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि भेंट स्वरूप बुके के बदले ‘बुक’ (किताब) के प्रचलन को राज्य में बढ़ावा दिया जाए.
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