देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग में लिपिक संवर्ग (बाबुओं) की मनमानी कार्यशैली पर वन मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग से प्रमोशन का लाभ लेने के बावजूद नई जगहों पर ज्वाइन न करने वाले 10 बाबुओं को वन मुख्यालय ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन कर्मचारियों को 15 दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, बिना नई पोस्टिंग पर कार्यभार ग्रहण किए ही इन कर्मचारियों को पदोन्नति का वेतन लाभ देने वाले आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) की भूमिका भी अब जांच के दायरे में आ गई है।
जानकारी के अनुसार, करीब दो महीने पहले वन विभाग में लिपिक संवर्ग के कई कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई थी। नियम के अनुसार, इन्हें निर्धारित समय के भीतर अपने नए कार्यस्थल पर रिपोर्ट करना था। लेकिन कई कर्मचारियों ने ज्वाइन करने के बजाय विभिन्न माध्यमों से अपने तबादला और तैनाती आदेशों में संशोधन या निरस्तीकरण कराने के प्रयास शुरू कर दिए। विभाग से किसी प्रकार की राहत न मिलने के बावजूद वे पुराने ठिकानों पर ही डटे रहे।
इस पूरे मामले का एक और गंभीर पहलू सामने आया है। जिन कर्मचारियों ने नई तैनाती पर ज्वाइन नहीं किया, उन्हें कुछ स्थानों पर पदोन्नति के अनुरूप बढ़ा हुआ वेतन और अन्य लाभ भी दिए जाते रहे। वन मुख्यालय अब इस बात की भी जांच करवा रहा है कि किन अधिकारियों की शह पर बिना नई पोस्टिंग ज्वाइन किए इन कर्मचारियों का वेतन जारी किया गया। नियमों की अनदेखी करने वाले ऐसे DDO पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
हाल ही में वन मुख्यालय में मानव संसाधन विकास (HRD) की जिम्मेदारी मुख्य वन संरक्षक (CCF) पीके पात्रो को सौंपी गई है। पदभार संभालते ही उन्होंने पेंडिंग फाइलों और तैनाती आदेशों की समीक्षा की। इस दौरान जब लिपिकों की यह मनमानी सामने आई, तो उन्होंने इसे सेवा नियमों और अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना। CCF पीके पात्रो के कड़े निर्देश के बाद ही तुरंत संबंधित 10 लिपिकों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए गए।
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि प्रमोशन केवल अधिकार नहीं बल्कि नई जिम्मेदारी भी है। यदि समय रहते इस तरह की मनमानी पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे पूरे प्रशासनिक ढांचे में गलत संदेश जाएगा। वन मुख्यालय अब इस मामले को एक उदाहरण के तौर पर देख रहा है। 15 दिनों के भीतर यदि कर्मचारियों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए, तो उनके खिलाफ कड़ी विभागीय व अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
उधर, CCF पीके पात्रो ने 10 लिपिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने संवेदनशील मामला होने के कारण इस पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार किया है।
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