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उत्तराखंड वन विभाग में बड़े फेरबदल की तैयारी: 12 जून को CSB की बैठक, कई जिलों के DFO और CF बदले जाने की चर्चा

  • मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में होगी महत्वपूर्ण बैठक; वनाग्नि सीजन में प्रदर्शन और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर तय होंगे नाम
  • गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कई महत्वपूर्ण प्रभागों के डीएफओ बदले जाने की प्रबल संभावना, एसीएफ की तबादला सूची भी तैयार

देहरादून। उत्तराखंड के वन विभाग में जल्द ही बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है. प्रदेश में वनाग्नि (जंगल की आग) का सीजन अभी पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ है, लेकिन विभाग के महत्वपूर्ण पदों पर तैनात अधिकारियों के तबादलों को लेकर शासन स्तर पर कसरत तेज हो गई है. डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) और कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (CF) स्तर के अधिकारियों के स्थानांतरण के प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए आगामी 12 जून को सिविल सर्विस बोर्ड (CSB) की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है.

प्रमुख बिंदु (Quick Facts):

  • तबादलों का स्तर: डीएफओ (DFO), सीएफ (CF) और सहायक वन संरक्षक (ACF) स्तर के अधिकारियों के तबादले तय.
  • बैठक की तिथि: 12 जून को सिविल सर्विस बोर्ड (CSB) की बैठक में लगेगी अंतिम मुहर.
  • अध्यक्षता: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन करेंगे बैठक की अध्यक्षता.
  • बड़ा बदलाव: राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक पद पर भी नए चेहरे की तैनाती की संभावना.

12 जून को सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक में होगा अंतिम फैसला

शासन द्वारा 12 जून को प्रस्तावित सिविल सर्विस बोर्ड (CSB) की इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन करेंगे. इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रमुख सचिव (वन), प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे. बैठक के दौरान विभिन्न वन प्रभागों में तैनात अधिकारियों के स्थानांतरण प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा होगी और अंतिम निर्णय लिया जाएगा. वनाग्नि सीजन के दौरान अधिकारियों के प्रदर्शन, उनकी कार्यक्षमता, पिछले कार्यकाल की अवधि और प्रशासनिक आवश्यकताओं का बारीकी से आकलन कर यह सूची तैयार की जा रही है.

इन महत्वपूर्ण वन प्रभागों में हो सकते हैं बदलाव

प्रशासनिक संतुलन और कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए दोनों मंडलों के कई महत्वपूर्ण प्रभाग इस तबादला सूची के दायरे में आ सकते हैं:

  • गढ़वाल मंडल: देहरादून, मसूरी, चकराता, उत्तरकाशी और टिहरी वन प्रभाग में अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव होने के संकेत हैं.
  • कुमाऊं मंडल: तराई क्षेत्र के बेहद महत्वपूर्ण वन प्रभागों जैसे— तराई पश्चिम, तराई पूर्वी और तराई केंद्रीय प्रभागों में तैनात अधिकारियों के प्रभार बदले जा सकते हैं. इसके अलावा रामनगर, टोंस और अल्मोड़ा वन प्रभागों पर भी शासन की नजर बनी हुई है.
  • अकादमी प्रभार: उपवन संरक्षक वानिकी प्रशिक्षण अकादमी के पद पर भी किसी अनुभवी और प्रशासनिक योग्यता रखने वाले अधिकारी को नई जिम्मेदारी दी जा सकती है.

राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक और ACF स्तर पर भी फेरबदल की चर्चा

वन विभाग के भीतर चल रही प्रशासनिक कवायद केवल डीएफओ स्तर तक ही सीमित नहीं है. वरिष्ठता के स्तर पर कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (CF) की जिम्मेदारियों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है. विशेष रूप से राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इस संरक्षित क्षेत्र के नेतृत्व में बदलाव को वन विभाग के सबसे बड़े प्रशासनिक परिवर्तनों में से एक माना जाएगा.

इसके साथ ही, सहायक वन संरक्षक (ACF) स्तर के अधिकारियों के तबादलों की तैयारी भी लगभग पूरी हो चुकी है और इसके आदेश भी जल्द ही जारी किए जा सकते हैं.


अनुभवी रेंज अधिकारियों को मिल सकता है बड़ा अवसर

अधिकारियों के तबादलों के साथ-साथ विभाग के जमीनी ढांचे को मजबूत करने की भी तैयारी की जा रही है. चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ रेंज अधिकारियों को उनकी कार्यक्षमता और वरिष्ठता के आधार पर प्रभारी उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) की बड़ी जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है. हालांकि, इससे संबंधित फाइल अभी शासन स्तर पर प्रक्रियाधीन है, जिस पर एसीएफ के तबादलों के साथ ही निर्णय लिया जा सकता है. यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो कई अनुभवी रेंज अधिकारियों को पहली बार उच्च प्रशासनिक दायित्व संभालने का अवसर मिलेगा.

अब वन विभाग और प्रशासनिक हलकों की निगाहें 12 जून को होने वाली सीएसबी (CSB) की बैठक पर टिकी हैं, जिसके बाद ही प्रदेश के वन क्षेत्रों की नई प्रशासनिक तस्वीर साफ होगी.

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