उत्तराखंड में ‘हरेला पर्व’ पर पहली बार बना विशेष एक्शन प्लान: 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य; कमेटियों में महिलाओं को मिलेगी 50% भागीदारी

देहरादून: उत्तराखंड के पारंपरिक लोकपर्व ‘हरेला’ को इस वर्ष अधिक सुनियोजित और परिणामोन्मुख बनाने के लिए वन पंचायतों ने राज्य सरकार के अन्य विभागों के साथ मिलकर पहली बार एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया है। इस बार अभियान का उद्देश्य केवल पारंपरिक रूप से पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और जनभागीदारी सुनिश्चित करना भी है। पूरे प्रदेश में इस अभियान के तहत करीब 10 लाख पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राज्य में इस वर्ष हरेला पर्व की शुरुआत आगामी 16 जुलाई से होगी और यह पर्यावरण अभियान पूरे एक महीने तक संचालित किया जाएगा।इस अभियान को सामाजिक आंदोलन का रूप देने के लिए राज्य और जिला स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया गया है। पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की अहम भूमिका को देखते हुए इन समितियों में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य की गई है। सरकार का मानना है कि महिलाओं की सक्रियता से जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को अधिक मजबूती मिलेगी।
इस बार हरेला पर्व के तहत केंद्र सरकार के लोकप्रिय अभियान ‘एक पेड़ मां के नाम’ को भी व्यापक स्तर पर शामिल किया जा रहा है। इसके जरिए ग्रामीणों और आम नागरिकों को अपनी माता के सम्मान में एक पौधा लगाने और उसके जीवित रहने तक उसकी देखभाल करने का संकल्प दिलाया जाएगा।
इस साल हरेला पर्व का राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम अल्मोड़ा जिले में वन पंचायत के स्तर पर आयोजित किया जाएगा। यहीं से पूरे प्रदेश को पर्यावरण संरक्षण और ‘हरित उत्तराखंड’ का संदेश दिया जाएगा।
विगत वर्षों में विभिन्न विभाग अपने-अपने स्तर पर पौधारोपण करते रहे हैं, लेकिन इस बार सभी विभागों के बीच समन्वय के लिए जिलाधिकारियों (DMs) को नोडल जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- पौधों का चयन: स्थानीय जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों के अनुकूल फलदार व छायादार प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- ग्राम स्तर पर भागीदारी: ग्राम प्रधानों और ग्रामीण समितियों को इस कार्ययोजना का मुख्य हिस्सा बनाया गया है ताकि पौधों के रोपण के बाद उनकी नियमित निगरानी और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
- संस्थाओं का जुड़ाव: स्कूलों, स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs), महिला स्वयं सहायता समूहों और युवक मंगल दलों को भी इस व्यापक अभियान से जोड़ा जा रहा है।
पहली बार तैयार किए गए इस एक्शन प्लान से वन विभाग और सरकार को उम्मीद है कि इस बार न केवल पौधारोपण का लक्ष्य हासिल होगा, बल्कि लगाए गए पौधों के जीवित रहने की दर (Survival Rate) में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
