
देहरादून: उत्तराखंड में भले ही मानसून ने अभी औपचारिक रूप से कदम न रखे हों, लेकिन प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के अनुसार, आगामी 28 जून से 2 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है। वहीं, 29 जून से 1 जुलाई के बीच प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में भारी बारिश की आशंका है, जिसे देखते हुए मौसम विभाग ने ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है।
पर्वतीय जिलों में आंधी-तूफान और बिजली चमकने की चेतावनी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 27 और 28 जून को उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं भी चल सकती हैं।
इन जिलों में रहेगा भारी बारिश का असर
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 29 जून से 2 जुलाई के दौरान कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत जिलों के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा, राज्य के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में मध्यम बारिश और मैदानी जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने बताया कि अगले दो दिनों के दौरान राज्य के कुछ पर्वतीय और मैदानी इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। उन्होंने बताया कि 28 जून के बाद से बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी, जिसके तहत 28 जून को कुमाऊं के अधिकांश हिस्सों और गढ़वाल के कुछ हिस्सों में बारिश दर्ज की जाएगी। इसके बाद, 29 जून से 1 जुलाई के बीच प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में बारिश का दौर तेज रहने का अनुमान है।
मौसम विभाग द्वारा जारी जरूरी दिशा-निर्देश (एडवाइजरी):
खराब मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता और यात्रियों की सुरक्षा के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं:
- सुरक्षित स्थानों पर रहें: 27 जून से 2 जुलाई के बीच आंधी-तूफान और बिजली चमकने के दौरान लोग अपने घरों के अंदर रहें और खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें। सुरक्षित और पक्के मकानों में ही आश्रय लें।
- बिजली उपकरणों से दूरी बनाएं: आकाशीय बिजली चमकने के दौरान बिजली का संचालन करने वाली वस्तुओं और उपकरणों से उचित दूरी बनाए रखें।
- यात्री बरतें सावधानी: पहाड़ों पर यात्रा करने वाले लोगों और वाहन चालकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। भूस्खलन संभावित संवेदनशील क्षेत्रों के पास रहने वाले लोग भी अतिरिक्त सावधानी बरतें।
- नदी-नालों से रहें दूर: बरसाती नदी और नालों के समीप रहने वाले लोगों तथा बस्तियों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है ताकि अचानक जलस्तर बढ़ने पर किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
