UTTARAKHAND

उत्तराखंड में जमीन विवाद पर सरकार का बड़ा फैसला: अब सीधे FIR नहीं कर पाएगी पुलिस; लैंड फ्रॉड कमेटी की हरी झंडी जरूरी

लैंड फ्रॉड कमेटी की बैठक

देहरादून | उत्तराखंड में जमीन से जुड़े विवादों और धोखाधड़ी के मामलों में राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। अब जमीन विवाद के मामलों में पुलिस सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कर पाएगी। किसी भी आपराधिक मामले की कार्रवाई से पहले ‘लैंड फ्रॉड कमेटी’ की जांच और संस्तुति अनिवार्य कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से सिविल मामलों में पुलिस की अनावश्यक दखलंदाजी रुकेगी।

TV10 INDIA ब्रीफ: मुख्य बातें

  • नया नियम: जमीन विवाद में अब डायरेक्ट पुलिस केस नहीं, पहले कमेटी करेगी जांच।
  • मकसद: सिविल और राजस्व मामलों को आपराधिक रंग देने से रोकना।
  • डेडलाइन: एसडीएम और तहसीलदार को 3 महीने के भीतर लंबित मामले निपटाने के निर्देश।
  • पेंडेंसी: गढ़वाल क्षेत्र में 200 से ज्यादा लैंड फ्रॉड मामले लंबित, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट।

क्यों लिया गया यह फैसला?

पिछले लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि देहरादून और हरिद्वार जैसे मैदानी जिलों में जमीन के छोटे-मोटे विवादों में भी पुलिस सीधे दखल देती है। कई बार सिविल प्रकृति (Civil Nature) के मामलों को भी आपराधिक बना दिया जाता है, जिससे जमीन मालिकों और खरीदारों का उत्पीड़न होता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पुलिस का काम कानून-व्यवस्था संभालना है, न कि सिविल विवादों को सुलझाना।

पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उठाई थी मांग

भाजपा के वरिष्ठ नेता और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत लंबे समय से इस बदलाव की वकालत कर रहे थे। उनका तर्क था कि पुलिस का काफी समय जमीन विवादों में बर्बाद हो जाता है, जिससे मूल अपराध नियंत्रण पर असर पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया था कि जमीन के मामलों का समाधान राजस्व विभाग और प्रशासन के माध्यम से ही होना चाहिए।

गढ़वाल कमिश्नर की बैठक में कड़े निर्देश

गढ़वाल कमिश्नर और मुख्यमंत्री के सचिव विनय शंकर पांडे ने लैंड फ्रॉड समिति की बैठक में लंबित मामलों की समीक्षा की। बैठक के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:

  1. पेंडिंग केस: 2021 से अब तक करीब 200 मामले लंबित हैं। समिति ने 15 दिन के भीतर इन पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
  2. 8 मामलों में FIR: जांच के दौरान जिन 8 मामलों में स्पष्ट धोखाधड़ी पाई गई, उनमें पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।
  3. निस्तारण की रफ्तार: अब तक 40 मामलों का समाधान किया जा चुका है, जबकि 160 पर काम जारी है।

तहसील स्तर पर भी कसेगा शिकंजा

कमेटी ने पाया कि कई फाइलें तहसीलदार और उपजिलाधिकारी (SDM) स्तर पर दबी हुई हैं। शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि तहसील स्तर पर लंबित जमीन विवादों का निस्तारण अधिकतम 3 महीने के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

पारदर्शिता आएगी, लेकिन देरी पर सवाल

सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और निर्दोष लोग पुलिसिया कार्रवाई से बचेंगे। हालांकि, पीड़ितों ने कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं। बैठक में पहुंचे एक व्यक्ति ने बताया कि जून 2024 के बाद अब जाकर समिति की बैठक हुई है। लोगों का कहना है कि यदि कमेटी की बैठकें नियमित और जल्दी-जल्दी नहीं हुईं, तो न्याय मिलने में और अधिक देरी हो सकती है।


TV10 INDIA नजरिया:
सरकार का यह कदम पुलिस की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए अच्छा है, लेकिन लैंड फ्रॉड कमेटी को “सुपर फास्ट” मोड में काम करना होगा। यदि कमेटी की जांच में ही सालों लग गए, तो भू-माफियाओं के हौसले और बुलंद हो सकते हैं।

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