मेलोडी टॉफी के बाद अब इटली में घुलेगा देहरादून की लीची का स्वाद: पहली बार 1,000 किलो ‘रोज सेंटेड’ लीची यूरोपीय बाजार में मचाएगी धूम; नई तकनीक से 10 दिन तक नहीं होगी खराब
देहरादून। कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई मुलाकात और सोशल मीडिया पर चर्चित रही ‘मेलोडी’ केमिस्ट्री के बाद, अब भारत और इटली के बीच स्वाद का एक नया प्राकृतिक अध्याय शुरू होने जा रहा है . देहरादून की विश्व प्रसिद्ध ‘रोज सेंटेड’ लीची पहली बार इटली के बाजारों में अपनी मिठास का जादू बिखेरने के लिए रवाना हो चुकी है .
उत्तराखंड के कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने सर्किट हाउस स्थित राजकीय उद्यान से 1,000 किलो (1 मीट्रिक टन) लीची की पहली निर्यात खेप को हरी झंडी दिखाई . देहरादून के बागवानी इतिहास में यह पहला मौका है जब यहाँ की लीची सात समंदर पार यूरोपीय संघ (EU) के किसी देश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी .
लीची अपनी मिठास के साथ-साथ अपनी नाजुक प्रकृति के लिए भी जानी जाती है . पेड़ से टूटने के बाद इसके छिलके का रंग तेजी से बदलने लगता है और सामान्य परिस्थितियों में 3 दिन के भीतर यह सड़ने लगती है . यही कारण था कि बेहतरीन गुणवत्ता होने के बावजूद देहरादून की लीची अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजारों से दूर थी .
कैसे संभव हुआ इटली का सफर?
इस बार इस चुनौती को आधुनिक पैकेजिंग और कोल्ड चेन सिस्टम की मदद से दूर किया गया है .
| विशेषता (Features) | विवरण (Details) |
| लीची की किस्म | रोज सेंटेड (देहरादून की सबसे प्रीमियम किस्म) |
| मुख्य खूबियां | प्राकृतिक खुशबू, पतली त्वचा, छोटा बीज और संतुलित मिठास |
| निर्यात की मात्रा | 1,000 किलोग्राम (पहली प्रायोगिक खेप) |
| निर्यात मार्ग | देहरादून से सड़क मार्ग (कोल्ड वैन) द्वारा दिल्ली, फिर वहां से हवाई मार्ग से इटली |
| सहयोगी संस्था | एपीडा (APEDA) और उत्तराखंड उद्यान विभाग |
उत्तराखंड सरकार और उद्यान विभाग इस पहल को राज्य की बागवानी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट मान रहे हैं .
“आधुनिक पैकेजिंग तकनीक के कारण लीची के निर्यात के नए रास्ते खुले हैं. लीची जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए अब तक इसे विदेशों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी. लेकिन नई पैकेजिंग प्रणाली और तापमान नियंत्रण तकनीक के जरिए अब इसे अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे न केवल निर्यात आसान होगा, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.”– एनसी शाह, टेक्निकल एक्सपर्ट, एपिडा
“विभाग लगातार उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने पर काम कर रहा है. हमारा लक्ष्य केवल पैदावार बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी क्वालिटी तैयार करना है जो यूरोपीय संघ के सख्त सैनिटरी मानकों (Sanitary Standards) पर खरी उतर सके. इसी प्रयास का नतीजा है कि आज हमारी लीची इटली जा रही है.”– डॉ. आर.के. सिंह, निदेशक, उद्यान विभाग
“यह उत्तराखंड के किसानों और हमारे बागवानी क्षेत्र के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है. राज्य सरकार हमारे कृषि और उद्यान उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है. हम भविष्य में अन्य स्थानीय फलों को भी इसी तरह वैश्विक मंचों पर भेजेंगे.”– गणेश जोशी, कृषि एवं उद्यान मंत्री, उत्तराखंड
देहरादून घाटी की खास मिट्टी और जलवायु यहां की लीची को एक अनूठा स्वाद प्रदान करती है . अब तक इसी तकनीक का प्रयोग करके बिहार के मुजफ्फरपुर से दुबई और पंजाब के पठानकोट से कतर तक लीची का सफल निर्यात किया जा चुका है .
अगर इटली भेजी गई देहरादून की यह 1,000 किलो लीची की पहली खेप वहां के मानकों और स्वाद की कसौटी पर खरी उतरती है, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की कृषि अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी और राज्य को वैश्विक फल निर्यात के मानचित्र पर एक सम्मानजनक स्थान मिल सकेगा .
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