UTTARAKHAND

नैनीताल जिले में भूसे के बाहर भेजने पर 15 दिन का बैन: कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन सख्त; ईंट-भट्टों में इस्तेमाल भी रुका

हल्द्वानी। नैनीताल जिले में पशुओं के मुख्य चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाले गेहूं के भूसे की बढ़ती कीमतों और इसकी संभावित कमी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने भूसे की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और जिले से बाहर परिवहन पर तत्काल रोक लगाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय पशुपालकों को चारे की किल्लत का सामना न करना पड़े।

खबर की बड़ी बातें :

  • परिवहन पर बैन: नैनीताल जनपद से भूसे को उत्तराखंड से बाहर भेजने पर 15 दिनों के लिए पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • इंडस्ट्रीज में इस्तेमाल वर्जित: अगले 15 दिनों तक ईंट भट्टों और अन्य औद्योगिक इकाइयों में भूसे के इस्तेमाल और बिक्री पर अस्थायी रोक रहेगी।
  • जमाखोरी पर नजर: कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए जिले में भूसे के अनावश्यक भंडारण और कालाबाजारी को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
  • पशुओं के संरक्षण की चिंता: प्रशासन का मानना है कि चारे की कमी होने पर पशुओं को लावारिस छोड़े जाने की समस्या बढ़ सकती है, जिसे रोकना जरूरी है।

ईंट-भट्टों और औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल पर रोक

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले के भीतर उत्पादित भूसे का उपयोग अगले 15 दिनों तक ईंट भट्टों या किसी भी अन्य औद्योगिक इकाई में नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही इन उद्योगों को भूसा बेचने पर भी पूरी तरह से अस्थायी प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में जिला प्रशासन भूसे की उपलब्धता का आकलन करेगा ताकि स्थानीय पशुपालकों की जरूरतें सबसे पहले पूरी हो सकें।

सीजन के बावजूद क्यों बढ़ रहे दाम?

पशुपालन से जुड़े लोगों के लिए सूखा चारा (गेहूं का भूसा) सबसे महत्वपूर्ण आहार होता है। सामान्यतः अप्रैल और मई के महीनों में गेहूं की कटाई के बाद बाजार में भूसा पर्याप्त मात्रा में आ जाता है और कीमतें सामान्य रहती हैं। लेकिन इस वर्ष गेहूं कटाई सीजन के तुरंत बाद भी भूसे के दामों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी जा रही है। कीमतों में इस उछाल को रोकने और स्थानीय स्तर पर पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है।

लापरवाही या आदेश उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

पशुपालकों के सामने चारे का कोई गंभीर संकट खड़ा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को लगातार फील्ड में सक्रिय रहने और सघन निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति या व्यापारी भूसे की जमाखोरी, कालाबाजारी या जिला प्रशासन के इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कानून सम्मत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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