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उत्तराखंड में मानसून 2026 को लेकर PWD का एक्शन प्लान: 120 क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन चिह्नित; रोबोट और 685 मशीनें तैनात, कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून सीजन 2026 के दौरान आपदा और बंद सड़कों की चुनौती से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) और आपदा प्रबंधन विभाग ने अपनी तैयारियां पूरी करने का दावा किया है। राज्य में चारधाम यात्रा को सुचारू रखने और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत पहुंचाने के लिए इस बार रोबोट, आधुनिक मशीनें और भारी संख्या में जनशक्ति (मैनपावर) को मैदान में उतारा गया है। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए फील्ड अधिकारियों और ऑपरेटरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।

खबर की बड़ी बातें :

  • सड़कों का विशाल नेटवर्क: उत्तराखंड में कुल 35,940 किमी लंबा सड़क नेटवर्क है, जिसे बहाल रखना मानसून के दौरान सबसे बड़ी चुनौती है।
  • संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन: राज्य मार्गों, जिला मार्गों और ग्रामीण सड़कों पर कुल 120 क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन की पहचान की गई है।
  • मशीनों और कर्मियों की फौज: सड़कों को तत्काल खोलने के लिए 9 रोबोट, 589 जेसीबी समेत कुल 685 मशीनें और 4,023 कर्मी तैनात किए गए हैं।
  • बैकअप और कनेक्टिविटी प्लान: आपातकाल के लिए 54 बैली ब्रिज, 4 फोल्डिंग ब्रिज और 376 वैकल्पिक मार्ग चिह्नित किए गए हैं।
  • ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम: सड़कों के बंद होने और खुलने की रियल-टाइम जानकारी के लिए ‘रोड क्लोजर रिपोर्टिंग ऑनलाइन सिस्टम’ विकसित किया गया है।

35 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का नेटवर्क

उत्तराखंड में लोक निर्माण विभाग के अधीन कुल 7,918 सड़कें हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 34,421 किलोमीटर है। यदि इनमें बीआरओ (BRO), एनएचएआई (NHAI) और एनएचआईडीसीएल (NHIDCL) की सड़कों को भी जोड़ दिया जाए, तो राज्य का कुल सड़क नेटवर्क 35,940 किलोमीटर तक पहुंच जाता है। चारधाम यात्रा के चलते मानसून के दौरान इन पहाड़ी मार्गों को चालू रखना प्रशासन के लिए परीक्षा की घड़ी होगी।

इन जिलों में हैं सबसे ज्यादा क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन

PWD की “क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन-2026” रिपोर्ट के अनुसार, अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और देहरादून जिलों में सबसे संवेदनशील क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।

  • नैनीताल जिला: यहाँ नैनीताल-कालाढूंगी मोटर मार्ग, नैनीताल-भवाली मार्ग, नैनीताल बाईपास, रामनगर-बेतालघाट और गर्जिया-बेतालघाट मार्गों पर कई सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र चिह्नित हैं।
  • देहरादून जिला: मसूरी रोड, सहस्त्रधारा-चामासारी मार्ग और कालसी-चकराता मार्ग को संवेदनशील माना गया है।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग: नेशनल हाईवे पर 57 और बीआरओ/NHAI/NHIDCL के अंतर्गत आने वाले मार्गों पर 22 संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन चिह्नित हैं।

“हाल ही में लोक निर्माण विभाग ने संवेदनशील और क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन को लेकर लेटेस्ट सर्वे करवाया गया। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 57 क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन चिन्हित किए गए हैं। राज्य मार्गों, जिला मार्गों और ग्रामीण सड़कों पर ऐसे 120 जोन मौजूद हैं।”– पंकज पांडे, सचिव, पीडब्ल्यूडी

चारधाम यात्रा मार्ग के लिए 11.84 करोड़ की डीपीआर

चारधाम यात्रा मार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए स्थायी उपचार पर काम किया जा रहा है। रुद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी-कालीमठ-कोटमा-जाल चौमासी मोटर मार्ग पर क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी एजेंसियों की मदद से 11.84 करोड़ रुपये की डीपीआर (DPR) तैयार की जा रही है। इसके अलावा चमोली के रुद्रप्रयाग-पोखरी मार्ग, पोखरी-हरिशंकर मार्ग और नंदप्रयाग-घाट-सुतोल-कनोल मार्ग तथा उत्तरकाशी के सिलक्यारा-बंगांव-छपरा-सरोत मार्ग व उत्तरकाशी बाईपास के लिए भी डीपीआर तैयार हो रही है।

मशीनों और जनशक्ति का जिलावार गणित

सड़कें बंद होने पर तत्काल मलबा हटाने के लिए बहु-एजेंसी रणनीति के तहत 685 मशीनें और 4,023 कर्मी मैदान में उतारे गए हैं।

  • मशीनों का बेड़ा: आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, तैनाती में 589 जेसीबी, 73 पोकलेन, 14 डोजर, 17 कंप्रेसर, 155 टिप्पर, 79 डम्पर, 25 वुड कटर और विशेष परिस्थितियों के लिए 9 रोबोट शामिल हैं।
  • मैनपावर डिप्लॉयमेंट: पौड़ी जिले में सबसे अधिक 203 श्रमिक तैनात किए गए हैं। इसके अलावा उत्तरकाशी में 167, देहरादून में 120, चमोली में 113, रुद्रप्रयाग में 91, अल्मोड़ा में 85, बागेश्वर में 58 और हरिद्वार में 40 श्रमिक तैनात हैं।
  • मशीनों की उपलब्धता: टिहरी जिले में सबसे अधिक 72 मशीनें (69 जेसीबी सहित) तैनात हैं। पौड़ी में 60 जेसीबी और देहरादून में 37 जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं।

“राज्यभर में सड़क अवरोध और भूस्खलन से निपटने के लिए 685 मशीनों के साथ 4023 कर्मियों की तैनाती की गई है। मानसून के दौरान पहाड़ी जिलों में अक्सर सड़कें बंद होने की घटनाओं को देखते हुए यह तैयारी बेहद अहम मानी जा रही है।”– विनोद सुमन, सचिव, आपदा प्रबंधन

वैकल्पिक मार्ग, बैली ब्रिज और हेलीपैड की तैयारी

यदि कोई मुख्य मार्ग भारी भूस्खलन के कारण लंबे समय के लिए बंद होता है, तो उसके लिए बैकअप प्लान तैयार रखा गया है:

  1. वैकल्पिक मार्ग: कुल 1,199 मार्गों के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए 376 वैकल्पिक मार्ग और 39 अतिरिक्त मार्ग तैयार रखे गए हैं।
  2. अस्थायी पुल: त्वरित कनेक्टिविटी के लिए 13 ट्रॉली ब्रिज, 54 बैली ब्रिज और 4 फोल्डिंग ब्रिज स्टैंडबाय पर हैं।
  3. कम्युनिकेशन: केदारनाथ, यमुनोत्री, कैलाश मानसरोवर और हेमकुंड साहिब मार्गों पर संपर्क बनाए रखने के लिए 14 वॉकी-टॉकी सेट दिए गए हैं।
  4. हेलीपैड: राहत और बचाव कार्यों के लिए 479 हेलीपैड (99 स्थायी और 380 अस्थायी) का विवरण तैयार रखा गया है।

लापरवाह अधिकारियों पर एक्शन, सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का दूसरा फेज सितंबर से

मानसून से पहले राज्य में सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान चलाया गया था। PWD सचिव पंकज पांडे के अनुसार, सड़कों की मरम्मत का काम 15 मई तक किया गया। हालांकि, अल्मोड़ा क्षेत्र में अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम समय पर नहीं हो पाया, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार, मानसून के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों को सुधारने के लिए 15 सितंबर से 30 अक्टूबर तक दोबारा गड्ढा मुक्त अभियान चलाया जाएगा।

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