देहरादून। उत्तराखंड में मानसून सीजन 2026 के दौरान आपदा और बंद सड़कों की चुनौती से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) और आपदा प्रबंधन विभाग ने अपनी तैयारियां पूरी करने का दावा किया है। राज्य में चारधाम यात्रा को सुचारू रखने और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत पहुंचाने के लिए इस बार रोबोट, आधुनिक मशीनें और भारी संख्या में जनशक्ति (मैनपावर) को मैदान में उतारा गया है। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए फील्ड अधिकारियों और ऑपरेटरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
उत्तराखंड में लोक निर्माण विभाग के अधीन कुल 7,918 सड़कें हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 34,421 किलोमीटर है। यदि इनमें बीआरओ (BRO), एनएचएआई (NHAI) और एनएचआईडीसीएल (NHIDCL) की सड़कों को भी जोड़ दिया जाए, तो राज्य का कुल सड़क नेटवर्क 35,940 किलोमीटर तक पहुंच जाता है। चारधाम यात्रा के चलते मानसून के दौरान इन पहाड़ी मार्गों को चालू रखना प्रशासन के लिए परीक्षा की घड़ी होगी।
PWD की “क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन-2026” रिपोर्ट के अनुसार, अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और देहरादून जिलों में सबसे संवेदनशील क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।
“हाल ही में लोक निर्माण विभाग ने संवेदनशील और क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन को लेकर लेटेस्ट सर्वे करवाया गया। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 57 क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन चिन्हित किए गए हैं। राज्य मार्गों, जिला मार्गों और ग्रामीण सड़कों पर ऐसे 120 जोन मौजूद हैं।”– पंकज पांडे, सचिव, पीडब्ल्यूडी
चारधाम यात्रा मार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए स्थायी उपचार पर काम किया जा रहा है। रुद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी-कालीमठ-कोटमा-जाल चौमासी मोटर मार्ग पर क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी एजेंसियों की मदद से 11.84 करोड़ रुपये की डीपीआर (DPR) तैयार की जा रही है। इसके अलावा चमोली के रुद्रप्रयाग-पोखरी मार्ग, पोखरी-हरिशंकर मार्ग और नंदप्रयाग-घाट-सुतोल-कनोल मार्ग तथा उत्तरकाशी के सिलक्यारा-बंगांव-छपरा-सरोत मार्ग व उत्तरकाशी बाईपास के लिए भी डीपीआर तैयार हो रही है।
सड़कें बंद होने पर तत्काल मलबा हटाने के लिए बहु-एजेंसी रणनीति के तहत 685 मशीनें और 4,023 कर्मी मैदान में उतारे गए हैं।
“राज्यभर में सड़क अवरोध और भूस्खलन से निपटने के लिए 685 मशीनों के साथ 4023 कर्मियों की तैनाती की गई है। मानसून के दौरान पहाड़ी जिलों में अक्सर सड़कें बंद होने की घटनाओं को देखते हुए यह तैयारी बेहद अहम मानी जा रही है।”– विनोद सुमन, सचिव, आपदा प्रबंधन
यदि कोई मुख्य मार्ग भारी भूस्खलन के कारण लंबे समय के लिए बंद होता है, तो उसके लिए बैकअप प्लान तैयार रखा गया है:
मानसून से पहले राज्य में सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान चलाया गया था। PWD सचिव पंकज पांडे के अनुसार, सड़कों की मरम्मत का काम 15 मई तक किया गया। हालांकि, अल्मोड़ा क्षेत्र में अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम समय पर नहीं हो पाया, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार, मानसून के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों को सुधारने के लिए 15 सितंबर से 30 अक्टूबर तक दोबारा गड्ढा मुक्त अभियान चलाया जाएगा।
हरिद्वार। खेल विभाग ने हरिद्वार के तैराक खिलाड़ियों को एक बड़ी सौगात दी है. रोशनाबाद स्थित…
मेलोडी टॉफी के बाद अब इटली में घुलेगा देहरादून की लीची का स्वाद: पहली बार…
हल्द्वानी। नैनीताल जिले में पशुओं के मुख्य चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाले गेहूं के…
कैबिनेट बैठक में नैनीताल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कट-ऑफ तिथि संशोधित…
सरकारी अस्पताल में डायलिसिस सुविधा की मांगपूर्व अध्यक्ष प्रत्याशी सरफराज अहमद ने CMO को लिखा…
संसदीय क्षेत्र में आपात स्थिति: कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के लोकसभा क्षेत्र में बड़ी दुर्घटना…