UTTARAKHAND

उत्तराखंड में बर्ड फ्लू की दस्तक, हजारों मुर्गियों की मौत, सरकार ने जारी किया अलर्ट

देहरादून: उत्तराखंड के कई जिलों में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) ने दस्तक दे दी है, जिससे पोल्ट्री फार्म मालिकों और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। उधम सिंह नगर और बागेश्वर जिलों में बर्ड फ्लू के मामलों की पुष्टि हुई है, जिसके चलते हजारों मुर्गियों की मौत हो गई है और कई को मारना पड़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

उधम सिंह नगर सबसे ज्यादा प्रभावित

बर्ड फ्लू का सबसे ज्यादा असर कुमाऊं मंडल के उधम सिंह नगर जिले में देखने को मिल रहा है। जिले के खटीमा और किच्छा क्षेत्र के पोल्ट्री फार्मों में अब तक लगभग 3200 मुर्गियों की मौत हो चुकी है। सितारगंज तहसील के शक्तिगढ़ स्थित एक मुर्गी फार्म में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए 1700 से अधिक मुर्गियों को मारकर दफना दिया है।

सितारगंज के बैकुंठपुर गांव के एक फार्म से भेजे गए सैंपलों की जांच में हाईली पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लूएंजा (HPAI) वायरस की पुष्टि हुई, जिसके बाद जिला प्रशासन ने फार्म के 1 किलोमीटर के दायरे को ‘संक्रमित क्षेत्र’ और 10 किलोमीटर के दायरे को ‘निगरानी क्षेत्र’ (सर्विलांस जोन) घोषित कर दिया है। इन क्षेत्रों में मुर्गियों और अंडों की खरीद-बिक्री और ढुलाई पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

बागेश्वर में भी पुष्टि, अन्य जिलों में सतर्कता

उधम सिंह नगर के अलावा बागेश्वर जिले के सोली गांव से लिए गए एक सैंपल में भी बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। मैदानी क्षेत्रों में बढ़ते मामलों को देखते हुए पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने भी एहतियाती कदम उठाए हैं। यहाँ अन्य जनपदों और नेपाल से मुर्गी, अंडे और मांस के आयात पर रोक लगा दी गई है। वहीं, उत्तर प्रदेश के रामपुर में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद देहरादून जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है और पोल्ट्री फार्मों से रैंडम सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम

बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क सहित राज्य के सभी चिड़ियाघरों और रेस्क्यू सेंटरों में कोविड जैसे प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए हैं। कॉर्बेट पार्क में कर्मचारियों को पीपीई किट पहनकर ही बाघ और गुलदारों के पास जाने की अनुमति है। अल्मोड़ा और देहरादून के चिड़ियाघरों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है और मांसाहारी वन्यजीवों के भोजन से चिकन को हटा दिया गया है।

प्रशासन की कार्रवाई और जनता से अपील

पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। संक्रमित फार्मों को सैनिटाइज किया जा रहा है और प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा मुर्गी पालकों और स्थानीय निवासियों की स्क्रीनिंग की जा रही है।प्रशासन ने आम जनता से कुछ दिनों तक चिकन और अंडों का सेवन न करने की अपील की है ताकि संक्रमण के किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके।

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