
देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान के बीच चुनाव आयोग ने आपदा प्रभावितों और आम जनता को बड़ी राहत दी है। साल 2025 की भीषण आपदा के दौरान जिनके घर बह गए या दस्तावेज नष्ट हो गए, उन्हें अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में बीएलओ (BLO) की मदद से ईआरओ (ERO) नोटिस का समाधान करेंगे।
आपदा प्रभावितों के लिए विशेष राहत
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि यदि आपदा के कारण किसी मतदाता के दस्तावेज गायब या क्षतिग्रस्त हो गए हैं, तो केवल ईआरओ का यह संतुष्ट होना पर्याप्त होगा कि संबंधित व्यक्ति भारत का नागरिक है। दस्तावेज न होने पर किसी का नाम बेवजह नहीं काटा जाएगा।
इसके साथ ही आयोग ने आपत्तियों के नियम भी तय किए हैं:
- आम व्यक्ति: एक व्यक्ति अधिकतम 5 मतदाताओं के नाम पर आपत्ति जता सकता है।
- राजनैतिक दल (BLA-2): राजनीतिक दलों के बीएलए रोजाना अधिकतम 10 मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
खुद मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को भी मिला नोटिस
मतदाता सूची के शुद्धिकरण अभियान के तहत प्रदेश में विसंगतियों के कारण करीब 19.04 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। आयोग की निष्पक्षता का आलम यह है कि खुद मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम को भी नाम में त्रुटि के चलते नोटिस प्राप्त हुआ है।
सीईओ ने आम जनता से अपील की है कि नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं। उन्होंने कहा, “मुझे भी नोटिस मिला है और मैं संबंधित दस्तावेज देकर इसे सही कराऊंगा। जनता भी बिना किसी भ्रम के अपना जवाब दर्ज कराए, ताकि मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध बनाया जा सके।”
65 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों और दिव्यांगों को घर पर मिलेगी सुविधा
चुनाव आयोग ने बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्था की है:
- डोर-टू-डोर सुनवाई: 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं को नोटिस की सुनवाई के लिए पोलिंग बूथ नहीं जाना पड़ेगा।
- अधिकारियों की फील्ड विजिट: सभी जिलों के डीईओ (DEO) को निर्देश दिए गए हैं कि सक्षम अधिकारी खुद ऐसे मतदाताओं के घर जाकर सुनवाई पूरी करेंगे।
एसआईआर अभियान के अब तक के आंकड़े
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एसआईआर प्रक्रिया के प्रगति आंकड़े साझा करते हुए बताया:
- जारी नोटिस: कुल 24 लाख 30 हजार नोटिसों के सापेक्ष अब तक 20 लाख 27 हजार नोटिस मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं।
- दावे और आपत्तियां (14 जुलाई से 5 अगस्त तक):
- फॉर्म-6 (नए नाम जोड़ने हेतु): 57,000 आवेदन
- फॉर्म-7 (नाम हटाने/आपत्ति हेतु): 22,668 आवेदन
- फॉर्म-8 (संशोधन/मैपिंग हेतु): 26,145 आवेदन
सीईओ ने बताया कि राजनीतिक दलों से लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने के लिए विधानसभा स्तर पर ईआरओ, जिला स्तर पर डीईओ और प्रदेश स्तर पर सीईओ खुद नियमित बैठकें कर रहे हैं।
