
- राहत की बात: 40 में से 27 मरीज पूरी तरह ठीक होकर डिस्चार्ज हुए, बाकी का इलाज जारी
- को-मॉर्बिडिटी का खतरा: जान गंवाने वाले पांचों मरीज पहले से किसी अन्य गंभीर बीमारी से थे पीड़ित
- सीएमओ की अपील: पैनिक न हों, जांच की सुविधा बढ़ने से आ रहे केस; कोविड जैसी सावधानियां बरतें
देहरादून: उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू (H1N1) के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। प्रदेश में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 40 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से अकेले देहरादून जिले से ही 28 मामले दर्ज किए गए हैं। राहत की बात यह है कि कुल 40 संक्रमितों में से 27 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि शेष मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
राज्य में अब तक स्वाइन फ्लू से 5 मरीजों की मौत दर्ज की गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, जान गंवाने वाले सभी पांचों मरीज ‘को-मॉर्बिडिटी’ (पहले से किसी गंभीर बीमारी) से ग्रसित थे।
खबर के 4 बड़े बिंदु (Key Highlights):
- देहरादून हॉटस्पॉट: कुल 40 मामलों में से 28 केस अकेले राजधानी देहरादून से।
- 5 मरीजों की मौत: मरने वाले सभी 5 मरीज पहले से अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे।
- अस्पतालों को निर्देश: आइसोलेशन बेड रिजर्व करने, पर्याप्त दवाएं, पीपीई किट, मास्क और सैनिटाइजर रखने के आदेश।
- घबराने की जरूरत नहीं: आईसीएमआर (ICMR) के मुताबिक अधिकांश मामले माइल्ड (हल्के लक्षण वाले) हैं।
अस्पतालों के लिए एडवाइजरी: आइसोलेशन वार्ड और दवाओं के पुख्ता इंतजाम
राज्य स्तर से एडवाइजरी जारी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को कड़े निर्देश दिए हैं:
- अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग से आइसोलेशन बेड चिह्नित किए जाएं।
- फ्लू ओपीडी में आने वाले संदिग्ध मरीजों के लिए अलग जांच और उपचार की व्यवस्था हो।
- पर्याप्त मात्रा में जरूरी दवाएं, मास्क, सैनिटाइजर और पीपीई (PPE) किट का स्टॉक रखा जाए।
- आवश्यकतानुसार इमरजेंसी मेडिकल सामग्री की तत्काल खरीद के निर्देश भी दिए गए हैं।
को-मॉर्बिडिटी वाले मरीजों को अधिक सतर्कता की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्तमान स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। आईसीएमआर (ICMR) की गाइडलाइन के अनुसार फिलहाल सामने आ रहे अधिकांश केस सामान्य फ्लू जैसे (माइल्ड) हैं।
हालांकि, निम्नलिखित संवेदनशील वर्गों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी:
- बुजुर्ग और 5 साल से कम उम्र के बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- डायबिटीज, किडनी, सांस, हृदय रोग या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग (को-मॉर्बिड मरीज)
सीएमओ का बयान: “जांच बढ़ने से केस सामने आ रहे, पैनिक न फैलाएं”
“कोरोना काल के दौरान अपनाई गई सावधानियां स्वाइन फ्लू से बचाव में भी पूरी तरह कारगर हैं। लोग सतर्क रहें, लेकिन किसी भी प्रकार की अफवाह या पैनिक की स्थिति न बनाएं। अब जांच सुविधाएं बढ़ चुकी हैं, इसलिए सामान्य सर्दी-जुकाम वाले मरीजों की भी जांच हो रही है, जिससे संक्रमितों की पहचान पहले की तुलना में अधिक हो रही है।”— डॉ. मनोज शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), देहरादून
स्वाइन फ्लू से बचाव: क्या करें और क्या न करें?
- मास्क पहनें: भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर जाते समय मास्क का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करें।
- लक्षण दिखने पर आइसोलेट हों: सर्दी, जुकाम, गले में खराश या तेज बुखार होने पर खुद को घर में रखें और जरूरी होने पर ही बाहर निकलें।
- खांसते-छींकते समय सावधानी: खांसते या छींकते समय हमेशा रुमाल या टिशू पेपर का प्रयोग करें।
- हाथों की स्वच्छता: सार्वजनिक सतहों को छूने से बचें और हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं या सैनिटाइज करें।
- खुले में न थूकें: सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से पूरी तरह परहेज करें।
