देहरादून | उत्तराखंड में इस बार गर्मी आने से पहले ही ‘रफूचक्कर’ हो गई है। अप्रैल से मई के शुरुआती हफ्ते तक हुई बेमौसम भारी बारिश और ओलावृष्टि ने प्रदेश के किसानों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों तक खेतों में खड़ी फसलें बिछ गई हैं। कृषि निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 35 दिनों में प्रदेश की 179.47 हेक्टेयर कृषि भूमि पर मौसम की मार पड़ी है।
कृषि विभाग की रिपोर्ट बताती है कि बेमौसम बारिश का सबसे भीषण रूप टिहरी जिले में देखने को मिला।
देहरादून किसान संगठन के पदाधिकारी आशीष राजवंशी ने बताया कि ओलावृष्टि इतनी खतरनाक थी कि किसानों के पॉली हाउस तक क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
नुकसान को लेकर सरकार अब हरकत में आई है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद सुमन ने कहा, “बारिश और ओलावृष्टि से कृषि व बागवानी को हुए नुकसान का लगातार आकलन किया जा रहा है। कृषि और उद्यान विभाग की टीमें फील्ड विजिट कर डेटा जुटा रही हैं। प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया गतिमान है।”
मई का महीना कटाई और नई बुवाई का होता है। ऐसे में अतिवृष्टि ने न केवल तैयार फसल को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि मिट्टी में नमी ज्यादा होने से अगली फसल की बुवाई में भी देरी होने की संभावना है। सिंचित क्षेत्रों की तुलना में असिंचित (बारिश पर निर्भर) क्षेत्रों के छोटे किसान इस आपदा से सबसे ज्यादा टूट गए हैं।
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