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परमाणु हमला हुआ तो सबसे पहले क्या करें?

सोचिए, आज सुबह भी एक आम सुबह जैसी थी। सूरज निकला, आपने चाय पी, अख़बार पढ़ा, शायद बच्चों को स्कूल भेजा या दफ्तर के लिए निकले। ज़िंदगी सामान्य थी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर अचानक, बस एक पल में, सब कुछ बदल जाए तो क्या होगा? एक ऐसी स्थिति जिस्से हम सब डरते हैं, एक परमाणु हमला? बात थोड़ी डरावनी है। परमाणु हथियारों का ख़तरा एक सच्चाई है, और दुनिया के हालात, खैर, आप जानते हैं। लेकिन डरने से ज़्यादा ज़रूरी है जानना। जानना कि अगर ऐसा हो भी जाता है, खासकर भारत जैसे देश में, तो हमारे पास बचने की क्या राहें हो सकती हैं। ये कोई डराने वाला वीडियो नहीं है। ये सिर्फ़ आपको थोड़ी जानकारी देने और शायद एक मुश्किल घड़ी के लिए मानसिक तौर पर तैयार करने की कोशिश है। वो भयानक पल कल्पना कीजिए उस पल की। आप सड़क पर चल रहे हैं, घर पर हैं, या दफ्तर में हैं, और अचानक, एक ऐसी रोशनी दिखती है जो आपने ज़िंदगी में पहले कभी नहीं देखी होगी। इतनी तेज़ कि सूरज भी उसके आगे कुछ नहीं। आपकी आंखें चुंधिया जाती हैं। आपका दिमाग़ सोच भी नहीं पाता कि क्या हो रहा है।


ये रोशनी है, परमाणु धमाके की। आपके पास सोचने का समय नहीं है। आपके अंदर से बस एक इच्छा जागती है – छुप जाओ! सुरक्षित हो जाओ! अगर आप उस रोशनी को सीधे देखते हैं, तो हो सकता है आप तुरंत देख ना पाएं। इसलिए, सबसे पहली, सहज प्रतिक्रिया? तुरंत अपनी आंखें बंद कर लें और किसी चीज़ से ढक लें!
कुछ सेकंड या मिनटों बाद, एक भयानक धमाका। एक ऐसी लहर जो हवा को चीरती हुई आप तक आती है। खिड़कियों के शीशे टूटते हैं, दरवाज़े उखड़ जाते हैं, बिल्डिंग्स हिल जाती हैं। मलबा उड़ने लगता है।
अगर आप बाहर हैं, तो तुरंत, बिना एक पल गंवाए, ज़मीन पर लेट जाएं। पेट के बल। अपने हाथों से अपने सिर और गर्दन को कसकर ढक लें। किसी मज़बूत चीज़ के नीचे जाएं अगर मुमकिन हो तो, जैसे कोई मेज। ये आपको शुरूआती धमाके और उड़ने वाले सामान से बचा सकता है।
अगर आस-पास कोई भी इमारत है, तो दौड़ें। जितनी जल्दी हो सके अंदर घुसें। कोई भी बिल्डिंग चलेगी, बस वो मज़बूत होनी चाहिए। खिड़कियों से दूर रहें!
मान लीजिए आप धमाके से बच गए और किसी तरह किसी इमारत के अंदर पहुंच गए। सांस लेते हुए आप सोचते हैं कि अब ख़तरा टल गया। लेकिन असल में, सबसे बड़ा ख़तरा अब शुरू होने वाला है। इसे कहते हैं ‘फॉलआउट’।
ये क्या बला है? परमाणु विस्फोट से radioactive धूल के बारीक कण बनते हैं। ये ऊपर आसमान में चले जाते हैं और फिर हवा के साथ उड़कर, धीरे-धीरे बारिश की तरह, ज़मीन पर गिरने लगते हैं। ये अदृश्य कण भयानक रूप से ख़तरनाक रेडिएशन फैलाते हैं, जो आपको बीमार कर सकता है और आपकी जान भी ले सकता है। ये कई घंटों या दिनों तक गिरते रह सकते हैं।
तो धमाके के तुरंत बाद आपका अगला कदम क्या होना चाहिए? एक सुरक्षित शेल्टर यानि शरण वाली जगह ढूंढना।
कैसी जगह? फॉलआउट से बचने के लिए आपको और रेडिएशन फैलाने वाले इन कणों के बीच मोटी, मज़बूत रुकावट चाहिए।
सबसे अच्छी जगह? ज़मीन के नीचे! कोई बेसमेंट, अंडरग्राउंड पार्किंग। मिट्टी रेडिएशन को सबसे ज़्यादा रोकती है।
अगर ज़मीन के नीचे नहीं है? तो किसी मज़बूत, पक्की बिल्डिंग के बीच के फ्लोर। बिल्डिंग जितनी ऊंची और पक्की होगी, फॉलआउट उतना मुश्किल से अंदर आएगा। छतें या ऊपर के फ्लोर सबसे असुरक्षित हैं क्योंकि वहां सीधे फॉलआउट गिरेगा। इमारत के बिल्कुल बीचों-बीच जाएं।
आपका लक्ष्य है, ज़्यादा से ज़्यादा मोटाई, आपके और बाहर की दुनिया के बीच। दीवारें जितनी मोटी, रेडिएशन उतना कम।
अब आप शेल्टर के अंदर हैं। शायद अकेले नहीं, शायद कुछ और लोग भी हैं। बाहर क्या हो रहा है, आपको नहीं पता। सबसे ज़रूरी काम है इंतज़ार करना। फॉलआउट गिरने में समय लगेगा और उसके बाद भी उसका रेडिएशन स्तर धीरे-धीरे कम होगा। शुरुआती 48 घंटे सबसे खतरनाक होते हैं। अधिकारियों के निर्देश आने तक, आपको कम से कम 48 घंटे, और शायद उससे भी ज़्यादा, हफ्तों तक, इस शेल्टर में रहना पड़ सकता है।

तो इस समय के लिए आपके पास क्या होना चाहिए? अगर आप पहले से थोड़े तैयार थे, तो ये चीज़ें सोने जैसी कीमती होंगी:
पानी: पीने के लिए। कम से कम चार लीटर प्रति व्यक्ति हर दिन के हिसाब से कुछ दिनों का स्टॉक।
खाना: जो बिना पकाए खाया जा सके और खराब न हो। डिब्बाबंद सब्ज़ियां या फल, बिस्कुट, मेवे.
फर्स्ट-एड किट: ज़रा सोचिए, आप अंदर हैं और किसी को चोट लग गई? या तबीयत बिगड़ गई? बेसिक दवाइयां, पट्टियां, मरहम बहुत ज़रूरी हैं।
टॉर्च और बैटरियां: बिजली शायद गुल हो गई होगी। अंधेरे से बचने के लिए रोशनी चाहिए।
एक बैटरी से चलने वाला रेडियो: या जिसे हाथ से घुमाकर चार्ज कर सकें। आपका बाहरी दुनिया से संपर्क शायद इसी के ज़रिए होगा। सरकारी निर्देश इसी पर आएंगे। मोबाइल नेटवर्क शायद ठप्प पड़ जाएंगे।
धूल से बचने के लिए मास्क: फॉलआउट के बारीक कण हवा में भी होंगे।
साफ-सफाई का सामान: वेट वाइप्स, हैंड सैनिटाइज़र। आपको खुद को साफ़ रखना होगा क्योंकि पानी लिमिटेड हो सकता है।
अगर डिब्बाबंद खाना है तो Can Opener! वरना भूखे रह जाएंगे।
कुछ ज़रूरी कागज़ात और कैश: पहचान पत्र, डॉक्टर के पर्चे।
और सबसे ज़रूरी? धैर्य और मानसिक मज़बूती।
सोचिए उस घुटन भरी जगह में घंटों, दिनों तक रहना। ये आसान नहीं होगा। लेकिन याद रखें, बाहर रेडिएशन जानलेवा है। हर पल जो आप अंदर सुरक्षित बिताते हैं, आपके बचने की संभावना बढ़ती है।
मान लीजिए, जब आप शेल्टर में घुस रहे थे, आपको दिखा कि बाहर धूल जैसा कुछ गिर रहा है। ये फॉलआउट हो सकता है। शेल्टर में घुसते ही, अपने कपड़े तुरंत, हो सके तो दरवाज़े के ठीक बाहर ही उतार दें। ये आपके शरीर पर या कपड़ों पर चिपके ज़्यादातर radioactive कणों को बाहर छोड़ देगा। अगर मुमकिन हो तो, गीले कपड़े से अपनी त्वचा या बालों को पोंछ लें। नहाने का मौका मिले तो बहुत अच्छा।
और हां, अपने प्यारे पालतू जानवर को भी सावधानी से साफ करें अगर वो आपके साथ है।
एक बार जब आप शेल्टर में सेट हो जाएं, तो कोशिश करें कि दरवाज़ों और खिड़कियों को कपड़े या टेप से सील कर दें ताकि बाहर के कण अंदर न आएं।

अब इंतज़ार, इंतज़ार, इंतज़ार। रेडियो पर नज़र रखें। जब तक स्थानीय आपदा प्रबंधन या सरकारी अधिकारी बाहर निकलने के लिए सुरक्षित घोषित न करें, बाहर बिलकुल न निकलें। वे रेडिएशन के स्तर को जांच कर ही ये ऐलान करेंगे। उनकी बात ध्यान से सुनें, क्योंकि वही आपको अगले कदम बताएंगे।
आखिरकार, वो पल आता है जब आप शेल्टर से बाहर कदम रखते हैं। दुनिया वैसी नहीं रही होगी जैसी आपने छोड़ी थी। इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा होगा। खाने-पीने की चीज़ों की कमी होगी। बिजली नहीं होगी। संचार मुश्किल होगा।

तैयारी हमारा सबसे शक्तिशाली हथियार है ऐसी किसी भी आपदा के लिए।
आज आप क्या कर सकते हैं?
परिवार से बात करें: बैठकर बात करें कि अगर ऐसी स्थिति आती है, तो आप सब कहां मिलेंगे? किसे संपर्क करेंगे? एक मीटिंग पॉइंट तय करें।
अपने घर और आसपास की ‘सेफ’ जगहें पहचानें: आपके घर में सबसे मज़बूत जगह कौन सी है? क्या कोई बेसमेंट है? या कोई अंडरग्राउंड पार्किंग नज़दीक है?
एक ‘Go Bag’ तैयार करें: एक छोटा बैग जिसमें कम से कम 24-48 घंटे के लिए ज़रूरी सामान हो – पानी की बोतल, एनर्जी बार, फर्स्ट-एड किट, मास्क, टॉर्च, पावर बैंक, ज़रूरी कागज़ात की फोटोकॉपी, कुछ कैश। ये वो बैग है जिसे आप सब कुछ छोड़कर भागते समय तुरंत उठा सकें।
घर में पानी और खाने का छोटा स्टॉक रखें: कम से कम कुछ दिनों के लिए ऐसा खाना जो जल्दी खराब न हो।

बेसिक्स सीखें: बेसिक फर्स्ट-एड कैसे करते हैं, आग कैसे बुझाते हैं – ऐसी चीज़ें मुश्किल घड़ी में काम आ सकती हैं।

शांति बनाए रखें: सबसे बड़ी तैयारी यही है कि ऐसे ख़तरे के बारे में जानकर घबराएं नहीं, बल्कि शांत मन से समझदारी भरे कदम उठाएं।

तो दोस्तों, परमाणु युद्ध की कल्पना ही रोंगटे खड़े कर देती है। हम सिर्फ दुआ कर सकते हैं कि हमें कभी भी ऐसे दिन का सामना न करना पड़े। लेकिन अगर दुर्भाग्य से ऐसा होता है, तो याद रखें:
ज़्यादातर लोग सीधे धमाके में नहीं मरते, बल्कि धमाके के बाद के कारणों से मारे जाते हैं।
तुरंत छुपना सबसे ज़रूरी है।
सुरक्षित शेल्टर में जाना और वहां सही समय तक रुके रहना आपके बचने की संभावना को सबसे ज़्यादा बढ़ा देता है।
पानी, खाना और रेडियो शेल्टर में आपके सबसे अच्छे दोस्त हैं।
तैयारी आपको थोड़ी राहत और नियंत्रण का एहसास दिला सकती है।

ये जानकारी आपको सशक्त बनाने के लिए है, डराने के लिए नहीं। जान लें कि ऐसे वक़्त में भी जीने की उम्मीद होती है, बशर्ते हम कुछ बातों का ध्यान रखें।
मिलते हैं अगले वीडियो में। जय हिन्द!

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