Web Stories

जब तुलसीदास को जगन्नाथपुरी में मिले स्वयं श्री राम

भगवत्कृपा से ओतप्रोत, श्रीरामभक्ति के परमोच्च शिखर पर विराजमान गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की कीर्ति दूर-दूर तक फैली हुई थी। एक बार उन्हें किसी भक्त ने बताया कि उड़ीसा के श्रीजगन्नाथपुरी में तो स्वयं भगवान् ही साक्षात रूप में दर्शन देते हैं। यह सुनकर तुलसीदास जी का हृदय आनंद से भर उठा। अपने इष्टदेव, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का प्रत्यक्ष दर्शन करने की उत्कट अभिलाषा लिए, वे तुरंत श्रीजगन्नाथपुरी की ओर चल पड़े।

महीनों की कठिन और थका देने वाली पदयात्रा, जिसमें उन्होंने असंख्य पड़ाव पार किए, वन-उपवन लाँघे और अनगिनत कष्ट सहे, अंततः समाप्त हुई। जब वे श्रीजगन्नाथपुरी पहुँचे, तो मंदिर में भक्तों की अपार भीड़ देखकर उनका मन प्रसन्न हो उठा। उत्सुकता और श्रद्धा से भरे हृदय से वे मंदिर के गर्भगृह में प्रविष्ट हुए।

किंतु, ज्योंही उनकी दृष्टि जगन्नाथ जी की प्रतिमा पर पड़ी, उन्हें जैसे एक तीव्र आघात लगा। उनकी आँखें उस स्वरूप को देखकर चौंक गईं। निराशा के गहरे बादल उनके मन पर छा गए। उन्होंने विचार किया कि यह हस्तपादविहीन देव, जिनके नेत्र गोलाकार हैं, यह मेरे जगत में सबसे सुंदर, नयनों को सुख देने वाले, धनुषधारी, श्यामवर्ण, मेरे इष्ट श्री राम कदापि नहीं हो सकते!

हताश और विचलित मन से वे मंदिर से बाहर निकल आए और दूर एक वट वृक्ष की छाँव में जा बैठे। उनके हृदय में भावनाओं का बवंडर उमड़ रहा था। इतनी दूर आना क्या व्यर्थ हुआ? क्या गोलाकार नेत्रों वाला, हाथ-पैर विहीन, दारु (काष्ठ) से निर्मित यह देव, मेरा राम हो सकता है? कदापि नहीं! यह तो सर्वथा मेरे राम के स्वरूप के विपरीत है!

रात्रि हो चुकी थी। तुलसीदास जी यात्रा की थकान, भूख और प्यास से व्याकुल थे। उनका शरीर शिथिल पड़ चुका था। निराशा के गहन अंधकार में वे अपने इष्ट का ध्यान करने लगे। तभी अचानक एक मधुर, कोमल स्वर सुनाई दिया:

“अरे बाबा!”

तुलसीदास जी ने चौंककर पूछा, “कौन है?”

एक तेजोमय बालक, हाथों में दिव्य महाप्रसाद की थाली लिए, उनके सामने खड़ा था। तुलसीदास जी ने सोचा, शायद साथ आए लोगों में से किसी ने पुजारियों को बता दिया होगा कि तुलसीदास जी भी दर्शन करने आए हैं, इसलिए उन्होंने प्रसाद भेज दिया होगा। वे उठते हुए बोले, “हाँ भाई! मैं ही हूँ तुलसीदास।”

बालक ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे! आप यहाँ हैं। मैं बड़ी देर से आपको खोज रहा हूँ।” बालक ने फिर कहा, “लीजिए, जगन्नाथ जी ने स्वयं आपके लिए प्रसाद भेजा है।”

तुलसीदास जी ने विनम्रतापूर्वक कहा, “भैया, कृपा करके इसे वापस ले जाएँ।”

बालक आश्चर्य से बोला, “यह कैसी बात करते हैं आप? ‘जगन्नाथ का भात-जगत पसारे हाथ’ और वह भी स्वयं महाप्रभु ने कृपापूर्वक भेजा है, और आप अस्वीकार कर रहे हैं? इसका कारण क्या है?”

तुलसीदास जी बोले, “अरे भाई! मैं अपने इष्ट का भोग लगाए बिना जल भी ग्रहण नहीं करता। फिर यह जगन्नाथ का जूठा प्रसाद, जिसे मैं अपने इष्ट को समर्पित न कर सकूँ, यह मेरे किस काम का?”

बालक ने मंद-मंद मुस्कराते हुए कहा, “अरे, बाबा! आपके इष्ट ने ही तो यह प्रसाद भेजा है!”

तुलसीदास जी ने विस्मय से देखा। बालक ने धैर्य से समझाते हुए कहा, “बाबा, क्या आप नहीं जानते कि आपके इष्ट ने ही यह प्रसाद भेजा है? आपने ही तो अपने श्रीरामचरितमानस में यह किस रूप का वर्णन किया है?”

बालक ने आगे कहा,
“हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रगट होहिं मैं जाना।”
(भगवान् सब जगह समान रूप से व्यापक हैं, पर मैं यह जानता हूँ कि वे प्रेम से प्रकट होते हैं।)

अब तुलसीदास जी की भाव-भंगिमा देखने लायक थी। उनके नेत्रों से अविरल अश्रुधारा बहने लगी। हृदय कृतज्ञता से भर गया। वे आवाक् रह गए, मुख से कोई शब्द नहीं निकल रहा था।

थाल भूमि पर रखकर, एक दिव्य मुस्कान बिखेरता हुआ वह बालक देखते ही देखते अदृश्य हो गया। जाते-जाते उसने कहा,

“तुलसी, ये स्वयं तुम्हारे राम हैं!”

तुलसीदास जी की स्थिति ऐसी थी जैसे उन्हें नवजीवन प्राप्त हो गया हो। रोम-रोम पुलकित था, अश्रुधारा अविरल बह रही थी और उन्हें अपने शरीर की कोई सुध ही नहीं थी। उन्हें भगवान के सर्वव्यापक स्वरूप का साक्षात्कार हो चुका था। उन्होंने बड़े प्रेम और श्रद्धा से उस महाप्रसाद को ग्रहण किया।

भगवान ने अपने परम भक्त के संशय को दूर कर, उन्हें अपने दिव्य और सर्वव्यापक स्वरूप का दर्शन कराया।

जिस स्थान पर गोस्वामी तुलसीदास जी ने रात्रि व्यतीत की थी, वह स्थान आज भी “तुलसी चौरा” नाम से विख्यात है। वहीं पर तुलसीदास जी की पीठ ‘बड़छता मठ’ के रूप में प्रतिष्ठित है, जो आज भी उस अद्भुत मिलन की साक्षी है

Tv10 India

Recent Posts

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: मदरसा बोर्ड खत्म, नया प्राधिकरण गठित

देहरादून: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म होगा, सरकार ने राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित कर…

2 days ago

सीएम की समीक्षा बैठक के बाद बड़ा फैसला, निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग तेज होगी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वैश्विक निवेशक सम्मेलन में हुए एमओयू के…

2 days ago

Mussoorie: प्रसिद्ध यात्रा लेखक पद्मश्री ह्यू गैंटज़र का निधन

मसूरी। प्रसिद्ध यात्रा लेखक और पद्मश्री सम्मानित ह्यू गैंटज़र का मंगलवार को 94 वर्ष की…

2 days ago

रेल बजट में उत्तराखंड को बड़ी राहत: 4,769 करोड़ रुपये से रफ्तार पकड़ेंगी परियोजनाएं

देहरादून: रेल बजट से उत्तराखंड को इस साल 4,769 करोड़ रुपये मिलेंगे। इससे ऋषिकेश-कर्णप्रयाग समेत…

3 days ago

Union Budget 2026: सीएम धामी ने केंद्रीय बजट को बताया ‘विकसित भारत’ का आधार

देहरादून | मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27…

4 days ago

मनरेगा से बेहतर वीबी जी रामजी योजना बेहतर, कांग्रेस का राम नाम का विरोध पुराना: रेखा

नानकमत्ता में वीबीजी रामजी योजना पर जिला सम्मेलन का आयोजनटीवी 10 इंडिया मीडिया नेटवर्कनानकमत्ता। कैबिनेट…

4 days ago