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कोटद्वार-दुगड्डा हाईवे पर हाथियों की धमक: खोह नदी के लिए पार कर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग, वन विभाग के चेतावनी बोर्ड न होने से खतरा बढ़ा

कोटद्वार: भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर जंगली हाथियों की सक्रियता अचानक काफी बढ़ गई है। दरअसल, प्यास बुझाने के लिए हाथी राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर खोह नदी की ओर रुख कर रहे हैं। इस स्थिति के बीच चौंकाने वाली बात यह है कि अति-संवेदनशील होने के बावजूद इस हाईवे पर वन विभाग की ओर से कहीं भी कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे राहगीरों के लिए खतरा लगातार बना हुआ है।

खोह नदी की ओर बढ़ रहे हैं हाथियों के झुंड
कोटद्वार से दुगड्डा के बीच का राष्ट्रीय राजमार्ग लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र से सटा हुआ है। जंगली जानवरों, विशेषकर हाथियों का इस क्षेत्र से गुजरना आम बात है, लेकिन इन दिनों भीषण गर्मी के कारण हाथी पानी पीने के लिए जंगल से निकलकर खोह नदी की तरफ आ रहे हैं। हाईवे पर पांच से अधिक ऐसे संवेदनशील स्थान चिन्हित हैं, जहां से हाथियों के झुंड सड़क पार करते हैं। हाथियों ने आवागमन के लिए बकायदा अपने रास्ते (कॉरिडोर) भी बनाए हुए हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग की ओर से इन स्थानों पर कोई चेतावनी या सूचक बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

शनिवार शाम को लगा घंटों लंबा जाम
हाथियों की इस धमक के कारण शनिवार शाम को कोटद्वार-दुगड्डा मार्ग पर पांचवें मील से करीब एक किलोमीटर आगे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक बच्चे के साथ हाथियों का झुंड हाईवे पर आ धमका। हाथी काफी देर तक बीच सड़क पर ही डटे रहे, जिसके कारण मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और घंटों जाम की स्थिति बनी रही। इस दौरान जब एक हाथी ने वाहनों की ओर रुख किया, तो यात्रियों में हड़कंप मच गया।

उत्तेजना और लापरवाही पड़ सकती है भारी
अक्सर देखा गया है कि हाईवे पर हाथियों को देखकर कई राहगीर उत्साहित हो जाते हैं और उनके नजदीक जाकर फोटो या सेल्फी खींचने का प्रयास करने लगते हैं। कई बार लोग हाथियों को भगाने के लिए उन पर पत्थर भी फेंक देते हैं, जिससे झुंड चिढ़ जाता है और हमलावर होकर लोगों के पीछे दौड़ने लगता है।

वन्यजीव विशेषज्ञों और सुरक्षा की दृष्टि से राहगीरों को यह सलाह दी जाती है कि वे हाथियों के नजदीक जाने या उन्हें उकसाने से बचें। यदि हाईवे पर हाथी दिखाई दें, तो सुरक्षित दूरी पर वाहनों को रोककर उनके शांतपूर्वक निकलने का इंतजार करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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