
उत्तरकाशी: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के पहले ही दिन यमुनोत्री पैदल मार्ग से एक दुखद खबर सामने आई है। यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए जा रहे दो तीर्थयात्रियों की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के इंदौर के निवासी के रूप में हुई है। डॉक्टरों ने मौत का प्राथमिक कारण हृदय गति रुकना (हार्ट अटैक) और ऑक्सीजन की कमी बताया है।
कठिन चढ़ाई के दौरान बिगड़ी तबीयत
यमुनोत्री धाम की 5 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई के दौरान दो अलग-अलग घटनाओं में यात्रियों ने दम तोड़ दिया:
- महाराष्ट्र के श्रद्धालु की मौत: नासिक निवासी उदय गजानन तांबे (65 वर्ष) रविवार शाम को पैदल मार्ग पर बेहोश हो गए थे। जानकीचट्टी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. हरदेव सिंह ने बताया कि एक नेपाली मजदूर उन्हें अस्पताल लेकर आया, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। आशंका जताई गई है कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई और फिर दिल का दौरा पड़ गया।
- मध्य प्रदेश की महिला की मृत्यु: इंदौर की रहने वाली प्रतिभा मिश्रा (40 वर्ष) की देर रात जानकीचट्टी के पास तबीयत खराब हुई। उन्हें अचेत अवस्था में स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने पंचनामा भरकर दोनों शवों को परिजनों को सौंप दिया है।
ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी बन रही जानलेवा
यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर जैसे-जैसे यात्री ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है। जानकीचट्टी स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों का कहना है कि यह स्थिति बुजुर्गों और दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित होती है।
डॉक्टरों की सलाह: डॉक्टर हरदेव सिंह पंवार ने अपील की है कि यमुनोत्री की पैदल यात्रा शुरू करने से पहले सभी श्रद्धालु अपना मेडिकल चेकअप जरूर कराएं। यदि कोई पहले से बीमार है, तो वह विशेष सावधानी बरते और दवाइयां साथ रखे।
चारधाम यात्रा का पहला दिन: करीब 10 हजार पहुंचे भक्त
19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया। प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
- यमुनोत्री धाम: 8,200 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
- गंगोत्री धाम: 1,600 श्रद्धालुओं ने मत्था टेका।
- कुल श्रद्धालु: पहले दिन कुल 9,800 तीर्थयात्री (जिनमें 5,503 पुरुष, 4,033 महिलाएं और 264 बच्चे शामिल थे) धाम पहुंचे।
- स्थानीय सहभागिता: मुख्य यात्रियों के अलावा करीब 2,800 स्थानीय श्रद्धालुओं और देव डोलियों ने भी दोनों धामों में उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे शारीरिक क्षमता का ध्यान रखते हुए ही यात्रा करें ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
