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ज्ञानवापी में व्यासजी के तहखाने में ‘पूजा के अधिकार’ के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका क्यों की खारिज?

ज्ञानवापी में व्यासजी के तहखाने में ‘पूजा के अधिकार’ के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका क्यों की खारिज?

नई दिल्ली: ज्ञानवापी में व्यासजी के तहखाने में हिन्दू पक्ष को पूजा का अधिकार देने के कदम पर निचली अदालत के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुहर लगाई. साथ ही यह भी कहा कि तहखाने में पूजा रोकने के लिए मुलायम सिंह सरकार का 1993 का कदम ‘अवैध’ था.  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं  को खारिज कर दिया, जिसमें 30 साल बाद हिन्दू पक्ष को पूजा का अधिकार मिला था. . कोर्ट ने कहा है कि वहां पूजा जारी रहेगी. और मुस्लिम पक्ष की दोनों याचिकाएं खारिज कर दी हैं. अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की अपीलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने ये फैसला सुनाया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का 1993 से धार्मिक पूजा-अनुष्ठान से लगातार रोकने का काम गलत था.  तहखाने में धार्मिक पूजा और अनुष्ठान जारी रखने वाले व्यास परिवार को मौखिक आदेश द्वारा प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता था. अनुच्छेद 25 के तहत गारंटीकृत नागरिक अधिकार को राज्य की मनमानी कार्रवाई से छीना नहीं जा सकता. तहखाने में भक्तों द्वारा पूजा और अनुष्ठान रोकना उनके हित के विरुद्ध होगा.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष तहखाने पर अपने प्रथम दृष्टया कब्जे को प्रदर्शित करने में बुरी तरह विफल रहा. अनिवार्य रूप से तहखाने पर व्यास परिवार के कब्जे के बारे में प्रथम दृष्टया निष्कर्ष निकालता है. मुस्लिम पक्ष ने 1937 के बाद दिसंबर 1993 तक व्यास परिवार से किसी भी समय तहखाने पर दावा नहीं किया. इससे तहखाने पर कब्जे के संबंध में उनके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकलता है. व्यास परिवार ने  प्रथम दृष्टया 1551 से अपना कब्जा स्थापित किया है.

गौरतलब है कि वाराणसी की कोर्ट ने 31 जनवरी को जिला जज वाराणसी ने हिंदू पक्ष को व्यासजी तहखाने में पूजा करने की अनुमति दी थी. मुस्लिम पक्ष ने पूजा का अधिकार देने वाले वाराणसी जिला जज के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.  मुस्लिम पक्ष द्वारा तहखाने में पूजा की अनुमति देने पर रोक लगाने  की मांग गई थी. मुस्लिम पक्ष की दो याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद 15 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था. आज मुस्लिम पक्ष की दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया गया.

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