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बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामला: बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और गणेश गोदियाल के बीच छिड़ी जंग, धामों में खुली बहस की चुनौती

देहरादून: बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला अब उत्तराखंड में एक बड़े राजनीतिक टकराव में तब्दील हो गया है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के वर्तमान अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं।

बीते दिन (14 जुलाई) जहां गणेश गोदियाल ने देहरादून प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर हेमंत द्विवेदी के इस्तीफे की मांग की थी और उन्हें लाइव डिबेट की चुनौती दी थी, वहीं आज (15 जुलाई) बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मंदिर समिति के कार्यालय में पलटवार किया। द्विवेदी ने गोदियाल के सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन पर अपने कार्यकाल में नियम विरुद्ध नियुक्तियां करने और मंदिर समिति के पैसों की बंदरबांट करने के गंभीर आरोप लगाए और उन्हें सीधे केदारनाथ या बदरीनाथ धाम में खुली बहस की चुनौती दी।

“खुद मंदिर समिति ने दर्ज कराया मुकदमा, कानून करेगा अपना काम”

प्रेस वार्ता के दौरान बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि जैसे ही मंदिर प्रशासन को चढ़ावे में गड़बड़ी की जानकारी मिली, तत्काल आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। उन्होंने कहा कि आरोपी वर्तमान में जेल में है और विभागीय जांच के साथ-साथ उच्च स्तरीय जांच भी जारी है। उन्होंने कहा, “भगवान बदरीविशाल और बाबा केदार से जुड़े मामलों में पारदर्शिता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और कानून के तहत दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।”

मुख्य आरोपी की नियुक्ति पर उठाए गंभीर सवाल

हेमंत द्विवेदी ने आरोप लगाया कि जिस कर्मचारी (प्रमोद नौटियाल) को लेकर आज कांग्रेस सवाल उठा रही है, उसकी नियुक्ति और पदोन्नति स्वयं कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुई थी। उन्होंने दस्तावेज पेश करते हुए दावा किया कि आरोपी की अस्थायी नियुक्ति और बाद में वैयक्तिक सहायक (PA) के रूप में नियम विरुद्ध नियुक्ति गणेश गोदियाल के कार्यकाल में ही हुई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को राजनीतिक बयानबाजी करने से पहले अपने कार्यकाल के दौरान किए गए इन फैसलों का जवाब देना चाहिए।

“पूर्व कार्यकाल में हुई मंदिर निधि की बंदरबांट”

हेमंत द्विवेदी ने गणेश गोदियाल के बीकेटीसी अध्यक्ष रहने के दौरान (साल 2012 से 2018 के बीच) हुए कुछ खर्चों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान मंदिर समिति के संसाधनों का उपयोग गैर-अधीनस्थ कार्यों और निजी हितों के लिए किया गया:

  • बिनसर मंदिर निर्माण: पौड़ी जिले के बिनसर मंदिर चौथान के निर्माण पर मंदिर समिति के कोष से लगभग 4 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
  • निजी भूमि तक सड़क निर्माण: प्रतापनगर क्षेत्र में एक निजी भूमि तक सड़क निर्माण के लिए 9 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
  • डॉक्यूमेंट्री निर्माण: एक निजी फर्म को डॉक्यूमेंट्री बनाने के नाम पर मंदिर समिति की निधि से करीब 12 लाख रुपये दिए गए।
  • गैर-अधीनस्थ मंदिर का जीर्णोद्धार: पोखरी क्षेत्र के एक ऐसे मंदिर के जीर्णोद्धार पर धनराशि खर्च की गई, जो बीकेटीसी के अधीनस्थ मंदिरों की सूची में शामिल ही नहीं था।

द्विवेदी ने कहा कि जनता के सामने इन सभी तथ्यों का आना जरूरी है ताकि स्पष्ट हो सके कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया था।

बदरीनाथ या केदारनाथ धाम में खुली बहस की चुनौती

गणेश गोदियाल द्वारा प्रेस क्लब में दी गई डिबेट की चुनौती का जवाब देते हुए हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यह मामला किसी राजनीतिक ड्रामा का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और संस्था की विश्वसनीयता का है। उन्होंने गोदियाल को चुनौती दी कि यदि उनके पास ठोस तथ्य हैं, तो वे बदरीनाथ या केदारनाथ धाम के पवित्र परिसर में आकर खुली चर्चा करें। वहां दोनों पक्ष अपने-अपने कार्यकाल के दस्तावेजों को जनता और भगवान के सामने रखें।

चारधाम विकास कार्यों का किया उल्लेख

प्रेस वार्ता के अंत में हेमंत द्विवेदी ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चारधाम क्षेत्र में किए जा रहे बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण परियोजना, बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान और ऑल वेदर रोड परियोजना ने यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाया है। इससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और पर्यटन को काफी बढ़ावा मिला है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर इन पवित्र धामों की गरिमा और परंपरा को बनाए रखने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं।

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