हरिद्वार: उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार के प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां मनसा देवी मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और चोरी की किसी भी आशंका को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर के पुजारियों और सेवादारों के लिए एक विशेष ड्रेस कोड लागू करते हुए ‘बिना जेब वाले कुर्ते’ पहनना अनिवार्य कर दिया है।
मंगलवार को ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने स्वयं मंदिर परिसर में पुजारियों और कर्मचारियों को ये विशेष कुर्ते वितरित किए। अब से सभी पुजारी और सेवादार बिना जेब वाले कुर्ते पहनकर ही मंदिर में अपनी सेवाएं देंगे।
ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने इस निर्णय की वजह बताते हुए हालिया विवादों और अपनी सुरक्षा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “हाल के दिनों में अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी और बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ी घटनाओं के बाद देशभर के मंदिरों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, हमारे विरोधी भी हमें बदनाम करने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र रचते रहते हैं। ऐसे में मंदिर की गरिमा और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था।”
उन्होंने आगे कहा कि अक्सर चोरी जैसी घटनाएं निचले स्तर के छोटे कर्मचारी करते हैं, लेकिन इसका खामियाजा बड़े पदों पर बैठे लोगों और पूरे मंदिर प्रबंधन को भुगतना पड़ता है। उंगली सीधे प्रबंधन पर उठाई जाती है और सनातन धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया जाता है। इसी शंका को जड़ से समाप्त करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
महंत रविंद्रपुरी ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की मर्यादा सबसे ऊपर है। इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने के लिए ट्रस्ट ने यह भी निर्णय लिया है कि यदि कोई भी पुजारी या कर्मचारी चढ़ावे की चोरी या किसी भी प्रकार की हेराफेरी में लिप्त पाया जाता है, तो बिना किसी ढिलाई के उसके खिलाफ सीधे पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। बिना जेब वाले कुर्ते लागू होने से सिक्के या नोट जेब में रखने जैसी गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, जिससे व्यवस्था में शुचिता बनी रहेगी।
मां मनसा देवी मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने ट्रस्ट की इस अनोखी और सख्त पहल का दिल खोलकर स्वागत किया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह कदम मंदिर प्रशासन की ईमानदारी, जवाबदेही और पारदर्शिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दर्शनार्थियों ने उम्मीद जताई कि देश के अन्य बड़े और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर भी इसी तरह की पारदर्शी व्यवस्थाएं लागू की जानी चाहिए, ताकि चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर भक्तों के मन में किसी भी प्रकार का संदेह न रहे और धार्मिक संस्थाओं के प्रति जनमानस का विश्वास और अधिक दृढ़ हो सके।
सीएम धामी के 'फैन' हुए कांग्रेस विधायक चमोली/गोपेश्वर: उत्तराखंड की राजनीति में अक्सर तीखे बयानों…
देहरादून। शहरी विकास विभाग इन दिनों एक अजीबोगरीब और हैरान करने वाले फैसले को लेकर…
देहरादून: बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला अब उत्तराखंड में एक बड़े…
देहरादून:बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की गणना और रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी के मामले में कार्रवाई…
अगस्त तक नीति का लक्ष्य: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इको टूरिज्म और ट्रैकिंग नीति को…
जनभागीदारी से बनेगी नीति: उत्तराखंड के खिलाड़ी, प्रशिक्षक, खेल विशेषज्ञ, खेल संघ, अभिभावक और आम नागरिक…