
चमोली: विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की हेराफेरी का मामला अब और गहराता जा रहा है। एसआईटी (SIT) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब जांच में दान से जुड़े दस्तावेजों में ‘ओवरराइटिंग’ (छेड़छाड़) का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने बड़ा कदम उठाते हुए खजांची संदेश मेहता को उनके पद से हटा दिया है।
संदेश मेहता मंदिर के डबल लॉकर में रखे सोना-चांदी और अन्य कीमती सामानों के संरक्षक (खजांची) थे। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि दान संबंधी रिकॉर्ड में बदलाव किसके इशारे पर किए गए। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी अब इस एंगल पर काम कर रही है कि क्या यह हेराफेरी किसी संगठित गिरोह का काम है।
जांच में क्या-क्या खुलासे हुए?
- दस्तावेजों में हेरफेर: जांच के दौरान एसआईटी को दान के अभिलेखों में जगह-जगह ओवरराइटिंग मिली है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
- पूर्व कर्मचारी का खुलासा: इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए पूर्व कर्मचारी राजेंद्र चौहान ने पूछताछ में दावा किया था कि वह तत्कालीन वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल के इशारे पर काम कर रहा था। एसआईटी अब इस बयान की पुष्टि अन्य साक्ष्यों से कर रही है।
- कुबेर के खजाने पर नजर: मामले की गंभीरता को देखते हुए अब एसआईटी कुबेर के खजाने की भी बारीकी से जांच करने की तैयारी में है।
- आगे और गिरफ्तारियां संभव: एसआईटी के निशाने पर अब कई अन्य संदिग्ध भी हैं। साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही और लोगों से पूछताछ या गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
बदरी-केदार मंदिर समिति के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि संदेश मेहता को खजांची की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है।
“संदेश मेहता पहले खजांची के पद पर थे, जो डबल लॉकर की चाबी संभालते थे। अब उन्हें वहां से हटाकर पूजा व्यवस्था और पूजा काउंटर की देखरेख का काम सौंप दिया गया है। जांच पूरी होने तक वे खजांची का कार्य नहीं देखेंगे।”— सोहन सिंह रांगड़, मुख्य कार्याधिकारी, बीकेटीसी
बदरीनाथ धाम में कीमती सामानों के लिए डबल लॉकर प्रणाली है। इसकी एक चाबी खजांची के पास और दूसरी किसी अन्य अधिकृत अधिकारी के पास होती है। बिना दोनों चाबियों के लॉकर नहीं खुल सकता। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि यदि हेराफेरी हुई है, तो क्या इसमें एक से अधिक लोगों की मिलीभगत है।
