UTTARAKHAND

धराली में आपदा के जख्मों पर लगेगा मरहम: खीर गंगा पर बनेगा ‘मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट’ पुल

भूमि सीमा का निरीक्षण करते राजस्व व बीआरओ की टीम

उत्तरकाशी: पिछले साल अगस्त माह में धराली में भारी तबाही मचाने वाली खीर गंगा नदी पर अब सीमा सड़क संगठन (BRO) एक बेहद मजबूत और आधुनिक पुल का निर्माण करने जा रहा है। गंगोत्री नेशनल हाईवे पर आवाजाही को निर्बाध रखने के लिए यहाँ ‘मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट’ पुल बनाया जाएगा। इस परियोजना के लिए बीआरओ ने राजस्व विभाग के साथ मिलकर स्थलीय निरीक्षण और भूमि सीमांकन का कार्य शुरू कर दिया है।

आपदा के बाद लिया गया निर्णय

गौरतलब है कि पिछले वर्ष 5 अगस्त को खीर गंगा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे ने धराली में भारी कहर बरपाया था। इस आपदा में कई होटल और भवन क्षतिग्रस्त हो गए थे, साथ ही गंगोत्री हाईवे भी करीब 25 फीट मलबे के नीचे दब गया था। उस समय बीआरओ ने मलबे को काटकर एक कच्ची सड़क तैयार की थी ताकि आवाजाही शुरू हो सके। हालांकि, आगामी मानसून में नदी के दोबारा उफान पर आने से इस सड़क के बहने का खतरा बना हुआ है। इसी स्थायी समाधान के लिए पुल निर्माण का निर्णय लिया गया है।

24 मीटर भूमि का होगा अधिग्रहण

पुल निर्माण के लिए बीआरओ कुल 24 मीटर भूमि का अधिग्रहण करेगा। बीआरओ के कमांडर राजकिशोर ने जानकारी दी कि:

  • पुल का स्पान 40 मीटर लंबा होगा।
  • ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत 12 मीटर भूमि का सर्वे पहले ही किया जा चुका है।
  • अब पुल के लिए 12 मीटर अतिरिक्त भूमि अधिग्रहित की जाएगी।
  • भूमि अधिग्रहण के संबंध में जल्द ही स्थानीय ग्रामीणों के साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी।

मंगलवार को बीआरओ और राजस्व विभाग की टीम ने ग्रामीणों की मौजूदगी में प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया और सीमांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

क्या होता है ‘मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट’ पुल?

मल्टी सेल बॉक्स कलवर्ट एक विशेष प्रकार का पुल होता है, जिसका निर्माण अक्सर उन नदी-नालों पर किया जाता है जहाँ जलस्तर में अचानक और भारी बढ़ोत्तरी की संभावना होती है।

  1. अध्ययन: इसका निर्माण करने से पहले संबंधित नदी के पिछले 15 वर्षों के इतिहास का अध्ययन किया जाता है।
  2. डिजाइन: नदी के जलस्तर और बहाव की क्षमता को देखते हुए इसका डिजाइन तैयार किया जाता है।
  3. संरचना: इसमें नदी के बीच में बेहद मोटे और मजबूत पिलर (कोशिकाएं) तैयार किए जाते हैं, जो मलबे और पानी के भारी दबाव को आसानी से झेल सकते हैं।

इस पुल के बनने से गंगोत्री धाम जाने वाले तीर्थयात्रियों और स्थानीय निवासियों को बरसात के मौसम में होने वाली दिक्कतों से बड़ी राहत मिलेगी।

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