UTTARAKHAND

बिना पासपोर्ट-वीजा भारत से ही करें कैलाश पर्वत के दर्शन: ओल्ड लिपुलेख व्यू प्वाइंट के लिए अभी 2 महीने का इंतजार; मानसून के बाद शुरू होंगे परमिट

पिथौरागढ़ श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक और आध्यात्मिक खबर है। अब आपको पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए चीन (तिब्बत) जाने की आवश्यकता नहीं है। आप उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित ‘ओल्ड लिपुलेख व्यू प्वाइंट’ से ही भारतीय सीमा के भीतर रहकर कैलाश शिखर के साक्षात दर्शन कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए श्रद्धालुओं को अभी करीब दो महीने का और इंतजार करना होगा।

मुख्य बातें

  • कहाँ से होंगे दर्शन: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में चीन सीमा पर स्थित ‘ओल्ड लिपुलेख’ (ऊंचाई 17,000 फीट से अधिक)।
  • क्यों है इंतजार: मानसून और भारी बारिश के कारण मार्ग बंद हैं, जिसके चलते फिलहाल ‘इनर लाइन परमिट’ जारी नहीं किए जा रहे हैं।
  • कब खुलेगा रास्ता: सितंबर-अक्टूबर के साफ मौसम में यात्रा और परमिट दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।
  • क्या है खासियत: बिना पासपोर्ट-वीजा और बेहद कम खर्च में भारतीय सीमा से ही कैलाश पर्वत के दर्शन संभव हैं। पिछले साल लगभग 10,000 श्रद्धालुओं ने इसका लाभ उठाया था।

पारंपरिक यात्रा से क्यों अलग है ओल्ड लिपुलेख?

पारंपरिक कैलाश-मानसरोवर यात्रा में श्रद्धालुओं को तिब्बत जाना पड़ता है, जहां कैलाश पर्वत की परिक्रमा और मानसरोवर झील के दर्शन होते हैं। इस यात्रा के लिए पासपोर्ट, चीनी वीजा और एक लंबी व खर्चीली प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

इसके विपरीत, ओल्ड लिपुलेख व्यू प्वाइंट से केवल कैलाश पर्वत के दर्शन होते हैं (यहां से मानसरोवर झील नहीं दिखती)। इस दर्शन के लिए किसी पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं होती। श्रद्धालु आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के साथ ही बेहद कम समय और कम खर्च में इस पावन स्थल के दर्शन कर सकते हैं।

17,000 फीट की ऊंचाई: रोमांच के साथ कठिन चुनौतियां भी

ओल्ड लिपुलेख चीन सीमा के बेहद करीब और समुद्र तल से करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक अत्यधिक संवेदनशील और ‘हाई एल्टीट्यूड’ (High Altitude) क्षेत्र है:

  1. बदलता मौसम: यहां का मौसम हर पल बदलता है। यदि आसमान में बादल और घना कोहरा छा जाए, तो कैलाश पर्वत दिखाई नहीं देता। दर्शन के लिए अनुकूल और साफ मौसम का होना बहुत जरूरी है।
  2. पैदल चढ़ाई और ऑक्सीजन की कमी: ओल्ड लिपुलेख तक सड़क का निर्माण तो हो चुका है, लेकिन अंतिम चोटी (व्यू प्वाइंट) तक पहुंचने के लिए लगभग 300 मीटर की खड़ी पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है।
  3. गाड़ियों के रुकने की समस्या: ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी के कारण कई बार वाहनों के इंजन बंद हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं को करीब डेढ़ किलोमीटर तक का सफर पैदल ही तय करना पड़ता है।

फिलहाल परमिट बंद; सेना और प्रशासन समन्वय में व्यस्त

यात्रा सीजन की शुरुआत में बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओल्ड लिपुलेख पहुंचे थे। लेकिन बाद में खराब मौसम, भूस्खलन और सुरक्षा कारणों से सेना ने इस क्षेत्र में आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी थी। स्थानीय लोगों और पर्यटकों की मांग है कि सेना और प्रशासन मिलकर एक ऐसा समन्वय तैयार करें जिससे सभी पात्र श्रद्धालुओं को यहां जाने की अनुमति मिल सके और सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिले।

अधिकारी का क्या है कहना?

“सेना से बेहतर समन्वय स्थापित कर श्रद्धालुओं को कैलाश दर्शन के लिए भेजने की व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में भारी बारिश और सुरक्षा कारणों से इनर लाइन परमिट जारी नहीं किए जा रहे हैं। जैसे ही सितंबर के आसपास परमिट प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी, आदि कैलाश और ओम पर्वत आने वाले श्रद्धालु ओल्ड लिपुलेख से कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकेंगे।”

— आशीष भटगाईं, जिलाधिकारी (DM), पिथौरागढ़

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