UTTARAKHAND

चारधाम यात्रा 2025: पहले ही दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, केदारनाथ में रिकॉर्ड 30 हजार से ज्यादा भक्त पहुंचे

देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2025 की शुरुआत ऐतिहासिक बनती जा रही है। पहले ही दिन केदारनाथ धाम में 30,154 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए, जो यह दर्शाता है कि इस बार श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है।

यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यात्रा के पहले ही दिन से ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है जैसे श्रद्धालुओं का सैलाब टूट पड़ा हो। लंबी कतारें, गूंजते जयकारे, और हर दिशा में भक्तिमय माहौल—सभी मिलकर यह संकेत दे रहे हैं कि यह यात्रा इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खुलने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है। वहीं, हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई को खोले जाएंगे।

इस अभूतपूर्व भीड़ के बीच राज्य सरकार के लिए भीड़ प्रबंधन और ट्रैफिक नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून जैसे प्रमुख शहरों में होटल और धर्मशालाएं पहले ही फुल बुक हो चुकी हैं, जिससे यात्रियों को ठहरने में दिक्कतें आ सकती हैं।

इसके अलावा, हालिया आतंकी घटनाओं के कारण कश्मीर जाने वाले पर्यटक भी उत्तराखंड और हिमाचल की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे चारधाम यात्रा पर भीड़ का दबाव और अधिक बढ़ सकता है।

बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खुलेंगे: ये आंकड़े 3 धाम यानी यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ के हैं. जबकि, अभी बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने बाकी हैं. बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खोले जाने हैं. वहीं, सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब की बात करें तो आगामी 25 मई को खोले जाएंगे.

क्या उत्तराखंड की ओर डायवर्ट हुआ कश्मीर का पर्यटन? विशेषज्ञों की मानें तो जो पर्यटक कश्मीर जाने का प्लान कर रहे थे, वो हिमाचल और उत्तराखंड की ओर डायवर्ट हो रहे हैं. जम्मू कश्मीर में जिस तरह से आतंकी हमला हुआ, उसके बाद पर्यटक चारधाम समेत तमाम पर्यटक स्थलों की रुख कर सकते हैं. इसका सीधा असर चारधाम यात्रा पर पड़ सकता है.

चारों धामों में श्रद्धालुओं की भीड़ और ज्यादा बढ़ने का अनुमान है. वहीं, अब स्कूलों की छुट्टियां भी पड़ने वाली है. इसके साथ ही जैसे-जैसे शहरी इलाकों में पारा चढ़ेगा, वैसे-वैसे राहत पाने के लिए लोग उत्तराखंड के तमाम हिल स्टेशनों की ओर जा सकते हैं. जिससे उत्तराखंड में दबाव बढ़ने का अनुमान है. ऐसे में राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां पेश आ सकती हैं.

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