UTTARAKHAND

चारधाम यात्रा: 47 दिनों में रिकॉर्ड 30 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, लेकिन मौतों का बढ़ता आंकड़ा प्रशासन के लिए चिंता का विषय

देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा इस समय अपने पूरे शबाब पर है। 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ शुरू हुई इस यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। 4 जून तक (मात्र 47 दिनों में) कुल 29,92,272 (करीब 30 लाख) श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। हालाँकि, जहाँ एक तरफ आस्था का यह सैलाब नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है, वहीं यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य संबंधी कारणों से हो रही श्रद्धालुओं की मौतें शासन-प्रशासन के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं।

47 दिनों में 152 श्रद्धालुओं की मौत (हृदय गति रुकने से)

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और कठिन चढ़ाई के कारण श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 152 श्रद्धालुओं की मौत हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) या स्वास्थ्य खराब होने के कारण हो चुकी है।

मार्ग-वार मौतों का विवरण:

  • केदारनाथ मार्ग: 74 मौतें (सबसे अधिक)
  • बदरीनाथ मार्ग: 44 मौतें
  • यमुनोत्री मार्ग: 19 मौतें
  • गंगोत्री मार्ग: 15 मौतें

धाम-वार श्रद्धालुओं के दर्शन का आंकड़ा (4 जून तक)

इस वर्ष सरकार द्वारा यात्रा पर किसी भी प्रकार की बंदिशें या सीमा न लगाने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है:

  • केदारनाथ धाम: 10,88,041 श्रद्धालु
  • बदरीनाथ धाम: 8,88,379 श्रद्धालु
  • गंगोत्री धाम: 11,227 श्रद्धालु
  • यमुनोत्री धाम: 9,601 श्रद्धालु

(नोट: चूंकि यात्रा में अभी भी लगभग चार महीने का समय शेष है, इसलिए इस वर्ष श्रद्धालुओं की कुल संख्या पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है।)

मानसून सीजन और प्रशासनिक चुनौतियाँ

उत्तराखंड में 21 जून के आसपास मानसून के दस्तक देने की संभावना जताई जा रही है। मानसून सीजन के दौरान भूस्खलन और भारी बारिश के कारण यात्रा की रफ्तार धीमी पड़ने और श्रद्धालुओं की संख्या सीमित होने की उम्मीद है।

राज्य के लाखों परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर इस यात्रा से जुड़ी हुई है, जिसके कारण सरकार यात्रा को सुचारू और सुगम बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा यात्रा मार्गों पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के तमाम दावे और प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही मौतें इन दावों और तैयारियों के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में खड़ी हैं।

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