UTTARAKHAND

कर्नल एसएस राजपुरोहित ने संभाली ‘निम’ उत्तरकाशी की कमान; बने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के 17वें प्रधानाचार्य

उत्तरकाशी, : देश के प्रतिष्ठित पर्वतारोहण संस्थान, नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) उत्तरकाशी को नया नेतृत्व मिल गया है. भारतीय सेना के अनुभवी पर्वतारोही और रणनीतिक प्रशिक्षक कर्नल एसएस राजपुरोहित ने संस्थान के 17वें प्रधानाचार्य के रूप में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लिया है. उनके कार्यभार संभालने के साथ ही संस्थान में प्रशिक्षण, सुरक्षा मानकों और आधुनिक पर्वतारोहण तकनीकों को और सुदृढ़ करने की दिशा में नई उम्मीदें जताई जा रही हैं.

पर्वतारोहण और सैन्य क्षेत्र में 24 वर्षों का व्यापक अनुभव

कर्नल एसएस राजपुरोहित का पर्वतारोहण और सैन्य अभियानों में लगभग 24 वर्षों का लंबा और सराहनीय अनुभव रहा है. उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उनकी सेवाएं उन्हें कठिन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने में सक्षम और एक कुशल नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करती हैं. वे मुख्य रूप से माउंटेन वॉरफेयर (पर्वतीय युद्ध), विंटर वॉरफेयर और कोल्ड वेदर ऑपरेशन्स के विशेषज्ञ माने जाते हैं, जिनका उपयोग भारतीय सेना के विभिन्न महत्वपूर्ण रणनीतिक अभियानों में किया जाता रहा है.

अपने शानदार पर्वतारोहण करियर के दौरान उन्होंने ‘माचोई पीक’ पर तीन बार सफल चढ़ाई पूरी की है. इसके अलावा उन्होंने अत्यंत चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले ‘माउंट भागीरथी-द्वितीय’ और ‘माउंट के-41’ जैसे अभियानों को भी सफलतापूर्वक पूरा कर अपनी क्षमता सिद्ध की है. स्काईडाइविंग में उनकी दक्षता उन्हें एक बहुआयामी साहसिक प्रशिक्षक के रूप में विशिष्ट बनाती है.

सुरक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता होगी सर्वोच्च प्राथमिकता

पदभार ग्रहण करने के बाद कर्नल राजपुरोहित ने संस्थान की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बनाए रखना और उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाना उनका मुख्य उद्देश्य होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत किया जाएगा, ताकि युवाओं को किसी भी प्रकार के संभावित जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके. संस्थान के नए नेतृत्व का मुख्य जोर व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुशासन और आधुनिक तकनीकी संसाधनों के बेहतर समन्वय पर रहेगा. इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है.

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) का गौरवशाली इतिहास

साल 1965 में स्थापित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग न केवल भारत का, बल्कि एशिया के प्रमुख पर्वतारोहण प्रशिक्षण केंद्रों में से एक है. यह संस्थान न केवल पर्वतारोहण की शिक्षा देता है, बल्कि खोज एवं बचाव (खोज एवं बचाव अभियान), आपदा प्रबंधन और विभिन्न एडवेंचर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है. देश-विदेश से आने वाले सैकड़ों प्रशिक्षु हर वर्ष यहाँ कठिन हिमालयी परिस्थितियों में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं.

कर्नल राजपुरोहित की नियुक्ति से यह उम्मीद जताई जा रही है कि संस्थान साहसिक खेल और पर्वतारोहण शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नए नवाचारों को बढ़ावा देगा, जिससे युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके.

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