UTTARAKHAND

उपनल कर्मचारियों को 1 मार्च से मिलेगा ‘समान कार्य समान वेतन’ का लाभ; सरकार ने हाईकोर्ट में पेश किया नया शासनादेश

नैनीताल, :उत्तराखंड के सरकारी विभागों में लंबे समय से कार्यरत उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, समान कार्य के लिए समान वेतन देने और उनके वेतन से जीएसटी कटौती रोकने की मांग को लेकर दायर अवमानना याचिका पर गुरुवार (2 जुलाई) को उत्तराखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई.

सरकार ने कोर्ट में पेश किया नया शासनादेश, बदली कट-ऑफ डेट

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 1 जुलाई 2026 को जारी एक नया शासनादेश पेश किया गया. इस नए आदेश के तहत सरकार ने उपनल कर्मचारियों के लिए कट-ऑफ तिथि को 12 नवंबर 2018 से बढ़ाकर 15 अक्टूबर 2024 कर दिया है. शासनादेश के अनुसार, इस संशोधित अवधि के अंतर्गत आने वाले सभी पात्र संविदा कर्मचारी ‘समान कार्य समान वेतन’ पाने के हकदार होंगे. इस फैसले का वित्तीय लाभ पात्र कर्मचारियों को 1 मार्च 2026 से प्रभावी रूप से दिया जाएगा.

सेवा शर्तों को लेकर कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से 3 फरवरी 2026 का एक अन्य आदेश भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया है कि ये संविदा कर्मी नियमित कर्मचारियों की तरह अन्य सेवा लाभों की मांग नहीं कर सकेंगे और उनकी नियुक्ति संविदात्मक आधार पर ही बनी रहेगी.

इस शर्त पर गंभीरता दिखाते हुए एकलपीठ ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण देने को कहा है. सरकार के अधिवक्ताओं ने इस बिंदु पर विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए अदालत से एक सप्ताह का समय मांगा. कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 जुलाई की तिथि निर्धारित की है.

क्या है पूरा मामला?

उपनल कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नवंबर 2025 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट आदेश जारी कर उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने, वेतन पर जीएसटी न वसूलने और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे.

कर्मचारी संगठन का कहना है कि लंबे समय के बाद भी सरकार द्वारा इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी. हालांकि, सरकार की ओर से अब 15 अक्टूबर 2024 की कट-ऑफ डेट लागू करने और 1 मार्च 2026 से समान वेतन देने के नए शासनादेश को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन संविदात्मक शर्तों पर अंतिम स्पष्टीकरण आना अभी बाकी है.

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