Categories: UTTARAKHAND

उत्तराखंड: परिवारों के विघटन को रोकने के प्रयासों में कमी, केवल 13% मामले हल होते हैं

देहरादून:उत्तराखंड में परिवारों के विघटन को रोकने के लिए किए गए प्रयासों में बड़ी कमी देखने को मिल रही है। यहां के परिवारों को बचाने के लिए बेहद कम प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, काउंसिलिंग से केवल 13 प्रतिशत मामले ही सुलझते हैं। इसका मतलब है कि अधिकांश मामले अनसुलझे ही रह जाते हैं। इस समस्या को हल करने के लिए सरकार और समाज को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

उत्तराखंड में पारिवारिक मामलों के निपटारे में काउंसलिंग की भूमिका अपेक्षाकृत कम रही है। यहां केवल 13% मामले ही काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाए जा सके हैं। इसके विपरीत, दिल्ली और चंडीगढ़ में इस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया गया है, जहां क्रमशः 60% और उच्च प्रतिशत में पारिवारिक विवादों का समाधान काउंसलिंग के जरिए किया जा रहा है। यह आंकड़े उत्तराखंड में पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने और विवादों को सुलझाने के लिए और अधिक संसाधनों और प्रयासों की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की परिवार न्यायालय समिति के सेमिनार में प्रस्तुत जानकारी ने उत्तराखंड में पारिवारिक विवादों के निपटान में काउंसलिंग की कम भूमिका को उजागर किया है। इस सेमिनार में, जो राजपुर रोड पर स्थित एक होटल में दो दिन तक चला, मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने परिवार न्यायालयों के महत्व और उनके द्वारा संभाले जा रहे मामलों पर अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर, अन्य वक्ताओं ने पति-पत्नी की जिम्मेदारियों और पारिवारिक संस्था को सुदृढ़ बनाने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। दिल्ली के उदाहरण को आदर्श मानते हुए, जहां 11 जिलों में 30 पारिवारिक न्यायालय सक्रिय हैं, वक्ताओं ने बताया कि काउंसलिंग के माध्यम से विवादों का समाधान कैसे अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इस तरह के सेमिनार पारिवारिक न्यायालयों की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा समाज में निभाई जा रही भूमिका को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।

उत्तराखंड में काउंसलिंग का स्तर काफी कम

पारिवारिक विवादों में काउंसलिंग की भूमिका और इसके प्रभाव के संदर्भ में, चंडीगढ़ के सेक्टर-43 की जिला न्यायालय की स्थिति उल्लेखनीय है। वहां की महिला हेल्पलाइन के माध्यम से अधिकांश मामलों का समाधान किया जाता है, जिससे वर्ष 2023 में 51% से बढ़कर फरवरी 2024 में 60% से अधिक मामले काउंसलिंग के जरिए सुलझाए गए। इसके विपरीत, उत्तराखंड में काउंसलिंग का स्तर काफी कम है, जहां मई 2022 से मार्च 2024 तक केवल 13% मामले ही सफलतापूर्वक काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाए गए। इस स्थिति को सुधारने के लिए, हाईकोर्ट ने देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, और ऊधमसिंह नगर के परिवार न्यायालयों में काउंसरों की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं। यह निर्णय पारिवारिक विवादों के समाधान में काउंसलिंग की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है और इसे बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है।

Tv10 India

Recent Posts

उत्तराखंड में कल भारी बारिश की चेतावनी: देहरादून, चमोली और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट; 7 जिलों में यलो अलर्ट जारी

देहरादून (उत्तराखंड) :मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने बृहस्पतिवार (6 अगस्त) को उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों…

16 hours ago

उत्तराखंड में सरकारी और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पर हाईकोर्ट सख्त: मुख्य सचिव को 2 हफ्ते में जवाब देने के निर्देश, हलफनामा भी होगा दाखिल

नैनीताल (उत्तराखंड) :उत्तराखंड में वन भूमि, राष्ट्रीय राजमार्गों, राजकीय राजमार्गों और राजस्व भूमि पर हुए…

16 hours ago

धराली आपदा की पहली बरसी: गीता पाठ के साथ 101 पौधे रोपकर दी श्रद्धांजलि; 115 घर हुए थे तबाह

उत्तरकाशी (उत्तराखंड) :उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त 2025 को आई विनाशकारी आपदा को आज…

17 hours ago

हरिद्वार कांवड़ यात्रा: गंगा के तेज बहाव में देवदूत बनी SDRF, 22 शिवभक्तों की बचाई जान; बिछड़े परिवारों का सहारा बनी पुलिस

हरिद्वार (उत्तराखंड)हरिद्वार में चल रहे कांवड़ मेले में शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। अब…

19 hours ago

उत्तराखंड में 10 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने राज्य के लिए 10 अगस्त तक का मौसम पूर्वानुमान जारी…

2 days ago