देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मंगलवार का दिन राजनीतिक गहमागहमी और विरोध प्रदर्शनों के नाम रहा। एक तरफ जहां महिला कांग्रेस ने विधानसभा सत्र के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं दूसरी तरफ पुलिस महकमे के एक आला अधिकारी पर लगे आरोपों ने शहर का पारा बढ़ा दिया है।
मंगलवार को विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोला। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तत्काल प्रभावी रूप से लागू करने की मांग को लेकर विधानसभा कूच किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि यह केवल कानून का हिस्सा न रहे, बल्कि इसे धरातल पर उतारकर महिलाओं को उनका उचित राजनीतिक अधिकार दिया जाए।
वहीं, देहरादून पुलिस मुख्यालय के बाहर छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने राजपुर रोड स्थित एक बार में हुए प्रकरण को लेकर एक आईजी (IG) रैंक के अधिकारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला दहन किया।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा विवाद एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ। आरोप है कि 25 अप्रैल की रात, देहरादून पुलिस द्वारा निर्धारित रात 11 बजे की डेडलाइन के बावजूद राजपुर रोड के एक बार में रात 12:30 बजे तक शराब परोसी जा रही थी और संगीत बज रहा था।
जब एसपी सिटी प्रमोद कुमार पुलिस बल के साथ बार बंद कराने पहुंचे, तो वहां कथित तौर पर आईजी रैंक के एक अधिकारी मौजूद थे। विवाद बढ़ता देख एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल को खुद मौके पर पहुंचना पड़ा, जिसके बाद रात करीब 1 बजे बार को बंद कराया गया।
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष हिमांशु ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “एक तरफ देहरादून पुलिस ‘ऑपरेशन प्रहार’ चलाकर अपराध नियंत्रण का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस के ही उच्च अधिकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।” छात्र संगठन ने मांग की है कि:
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे राज्य में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
इस हाई-प्रोफाइल मामले का संज्ञान लेते हुए एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) वी. मुरुगेसन ने आईजी और एसएसपी देहरादून को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस मुख्यालय ने इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
बता दें कि सीपीआई (एमएल) के प्रदेश सचिव इंद्रेश मैखुरी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो के बाद यह मामला सार्वजनिक हुआ, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पुलिस अधिकारी की मौजूदगी के कारण ही बार देर रात तक खुला रहा और पुलिस टीम को धमकाया भी गया।
अब सबकी नजरें मुख्यालय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट और शासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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