UTTARAKHAND

तपते जंगल में ‘गजराज’ की मौज: हरिद्वार के वाटर होल में मस्ती करते दिखे हाथियों के झुंड; प्यास बुझाने के लिए विभाग ने किए खास इंतजाम

हरिद्वार | उत्तराखंड में गर्मी का पारा चढ़ते ही इंसानों के साथ-साथ बेजुबान वन्यजीवों के लिए भी पानी का संकट गहराने लगा है। जंगल के प्राकृतिक स्रोत सूखने लगे हैं, लेकिन हरिद्वार वन विभाग की मुस्तैदी से वन्यजीवों को बड़ी राहत मिली है। हरिद्वार की चीला और पथरी रेंज के जंगलों से सुखद तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहां जंगली हाथियों के झुंड विभाग द्वारा बनाए गए कृत्रिम ‘वाटर होल’ (तालाबों) में जलक्रीड़ा करते और प्यास बुझाते नजर आ रहे हैं।

पथरी जंगल में एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। यहां वन विभाग के कर्मचारी ट्यूबवेल के जरिए वाटर होल में पानी भर ही रहे थे कि प्यासे हाथियों का एक झुंड वहां पहुंच गया। एक तरफ पाइप से पानी गिरता रहा और दूसरी तरफ हाथी उसी पानी के नीचे मस्ती करते और अपनी प्यास बुझाते दिखे। विभाग की इस सक्रियता के कारण वन्यजीवों को पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर नहीं भटकना पड़ रहा है।

7 वाटर होल से बुझ रही प्यास, 4 नए तालाब तैयार

वन विभाग ने गर्मी की चुनौती से निपटने के लिए हरिद्वार रेंज के पथरी जंगल में व्यापक इंतजाम किए हैं:

  • नए निर्माण: पथरी जंगल में 4 नए वाटर होल तैयार किए गए हैं।
  • जीर्णोद्धार: पुराने पड़ चुके 3 वाटर होल की मरम्मत कर उन्हें दोबारा चालू किया गया है।
  • सप्लाई: ट्यूबवेल के जरिए इन तालाबों में नियमित पानी भरा जा रहा है और वनकर्मी इसकी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
  • अन्य वन्यजीव: हाथियों के अलावा गुलदार, चीतल और सांभर जैसे जानवर भी इन वाटर होल का लाभ उठा रहे हैं।

इंसानी बस्तियों में न घुसें जानवर, इसलिए 4 KM लंबी सोलर फेंसिंग

वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ विभाग ने ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष’ रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं। हरिद्वार रेंज की टिगरी बीट में करीब 4 किलोमीटर लंबी सोलर फेंसिंग लगाई गई है।
रेंज अधिकारी शीशपाल सिंह ने बताया कि इस फेंसिंग का दोहरा फायदा है—एक ओर वन्यजीव जंगल की सीमा के भीतर सुरक्षित रहेंगे, वहीं दूसरी ओर वे आसपास के ग्रामीण इलाकों में घुसकर किसानों की फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे।

विभाग की रणनीति: तापमान बढ़ा तो और बनेंगे तालाब

वन अधिकारियों के मुताबिक, विभाग लगातार तापमान पर नजर रख रहा है। अगर गर्मी और बढ़ती है और जरूरत महसूस हुई, तो जंगल के अन्य हिस्सों में भी नए वाटर होल बनाए जाएंगे। प्राथमिकता यही है कि वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास के भीतर ही पर्याप्त पानी और सुरक्षा मिले।

tv10 indiaइनसाइट: जंगलों में कृत्रिम वाटर होल की व्यवस्था न केवल वन्यजीवों की जान बचाती है, बल्कि उन्हें आबादी की ओर आने से रोककर ‘मैन-एनिमल कॉन्फ्लिक्ट’ को भी कम करती है। गर्मी के सीजन में यह मॉडल अन्य फॉरेस्ट रेंज के लिए भी जरूरी है।

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