UTTARAKHAND

वैशाख पूर्णिमा 2026: 1 मई को सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और दान का महत्व

धर्म-कर्म | हिंदू पंचांग में वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व है। साल 2026 में वैशाख पूर्णिमा का व्रत 1 मई को रखा जाएगा। इस बार यह तिथि बेहद खास है क्योंकि इस दिन ‘सिद्धि योग’ बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस योग में की गई पूजा, साधना और दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।

वैशाख पूर्णिमा की बड़ी बातें:

  • तारीख: 1 मई 2026 (गुरुवार)।
  • सिद्धि योग: सुबह से रात 9:13 बजे तक।
  • नक्षत्र: स्वाति नक्षत्र (2 मई की सुबह 4:35 बजे तक)।
  • विशेष फल: मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और पापों से मुक्ति।

सिद्धि योग और स्वाति नक्षत्र का संयोग

इस पूर्णिमा पर सिद्धि योग रात 9:13 बजे तक रहेगा। इस दौरान किए गए शुभ कार्यों में सफलता की संभावना अधिक होती है। साथ ही, स्वाति नक्षत्र का प्रभाव आध्यात्मिक उन्नति और आत्मचिंतन के लिए उत्तम माना गया है। साधकों के लिए यह समय विशेष मंत्र सिद्धि के लिए फलदायी है।

कैसे करें भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा?

  1. स्नान: सुबह उठकर पवित्र नदी या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। ‘ओम नमो नारायणाय’ मंत्र का जप करें।
  2. वस्त्र: इस दिन पीले या सफेद रंग के साफ वस्त्र पहनना शुभ होता है।
  3. संकल्प: पूजा स्थान पर बैठकर व्रत और शुद्धि का संकल्प लें।
  4. पूजन: भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, तुलसी दल (अनिवार्य), फल और मिठाई अर्पित करें।
  5. शंख: यदि घर में शंख है, तो उससे भगवान को जल अर्पित करें।

चंद्र देव को अर्घ्य देने का महत्व

पूर्णिमा की रात को चंद्र देव की पूजा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

  • विधि: शाम को चंद्रमा उदय होने पर तांबे के लोटे में जल, कच्चा दूध, अक्षत (चावल) और फूल डालकर चंद्र देव को अर्घ्य दें।
  • फायदा: मान्यता है कि इससे कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

दान से मिलेगा ‘अक्षय पुण्य’

वैशाख मास में गर्मी का प्रभाव रहता है, इसलिए इस दिन शीतल वस्तुओं का दान श्रेष्ठ माना गया है:

  • क्या दान करें: सत्तू, जल से भरा घड़ा (कलश), फल और वस्त्रों का दान करें।
  • महत्व: इस दिन किए गए दान से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

स्नान-दान की परंपरा

धार्मिक मान्यता है कि वैशाख पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं। यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो किसी भी पवित्र सरोवर या घर में ही ‘गंगा मैया’ का स्मरण कर स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है।

Disclaimer: यह खबर धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या ज्योतिषी से सलाह जरूर लें।

Tv10 India

Recent Posts

उपनल कर्मियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार ने वापस लिया हलफनामा, 10 सितंबर को 3 सचिवों को पेश होने का आदेश

मुख्य बिंदु: पुराना हलफनामा वापस लिया: राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दायर शपथ पत्र…

57 mins ago

सरकारी स्कूलों की दुर्दशा पर नैनीताल हाईकोर्ट सख्त, पुराने आंकड़ों पर जताई नाराजगी; मांगी वर्तमान स्थिति

मुख्य बिंदु: पुराने आंकड़ों पर हाईकोर्ट की नाराजगी: मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा…

1 hour ago

उत्तराखंड में बारिश का कहर: अलकनंदा खतरे के निशान के पास पहुंची, डैम के गेट खोले; लक्सर के 24 से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा

मुख्य बिंदु: नदियां-नाले उफान पर: चमोली और रुद्रप्रयाग में मूसलाधार बारिश से मैदानी इलाकों में जनजीवन…

1 hour ago

उत्तराखंड वन विभाग में 6 ACF अफसरों के तबादले: वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी प्रभारी DFO की कमान, देखें पूरी ट्रांसफर लिस्ट

उत्तराखंड वन विभाग में राज्य वन सेवा संवर्ग (ACF) के 6 अधिकारियों के तबादले किए…

2 hours ago

उत्तराखंड SIR विवाद: वोट काटने के आरोपों पर घिरी बीजेपी, कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी; जानिए क्या है पूरा मामला

देहरादून। उत्तराखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर राज्य में राजनीतिक पारा…

7 hours ago

उत्तराखंड में तीलू रौतेली पुरस्कारों का ऐलान: 8 अगस्त को CM धामी 13 महिलाओं और 35 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को करेंगे सम्मानित; देखें पूरी लिस्ट

देहरादून:उत्तराखंड में समाज निर्माण और महिला सशक्तिकरण में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित…

7 hours ago