धर्म-कर्म | हिंदू पंचांग में वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व है। साल 2026 में वैशाख पूर्णिमा का व्रत 1 मई को रखा जाएगा। इस बार यह तिथि बेहद खास है क्योंकि इस दिन ‘सिद्धि योग’ बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस योग में की गई पूजा, साधना और दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
इस पूर्णिमा पर सिद्धि योग रात 9:13 बजे तक रहेगा। इस दौरान किए गए शुभ कार्यों में सफलता की संभावना अधिक होती है। साथ ही, स्वाति नक्षत्र का प्रभाव आध्यात्मिक उन्नति और आत्मचिंतन के लिए उत्तम माना गया है। साधकों के लिए यह समय विशेष मंत्र सिद्धि के लिए फलदायी है।
पूर्णिमा की रात को चंद्र देव की पूजा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
वैशाख मास में गर्मी का प्रभाव रहता है, इसलिए इस दिन शीतल वस्तुओं का दान श्रेष्ठ माना गया है:
धार्मिक मान्यता है कि वैशाख पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं। यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो किसी भी पवित्र सरोवर या घर में ही ‘गंगा मैया’ का स्मरण कर स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है।
Disclaimer: यह खबर धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या ज्योतिषी से सलाह जरूर लें।
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