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उत्तराखंड की ‘रेनबो ट्राउट’ मछली ने विदेशी बाजारों में बनाई धाक; नेपाल को भेजी गई 5 मीट्रिक टन खेप, अब दुबई और यूरोप की तैयारी

  • मत्स्य पालकों को लाभ: पिथौरागढ़ की तीन समितियों के 33 मत्स्य पालकों को मिला ₹23.50 लाख का मुनाफा।
  • अगला बड़ा लक्ष्य: जल्द ही खाड़ी देशों, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया में 30 टन अतिरिक्त मछली निर्यात करने की योजना।
  • मत्स्य क्षेत्र में उछाल: राज्य में मत्स्य पालकों की संख्या बढ़कर 15,657 हुई; उत्पादन वृद्धि दर बढ़कर 11% पर पहुंची।

देहरादून। उत्तराखंड की ठंडी वादियों में तैयार होने वाली प्रसिद्ध ‘रेनबो ट्राउट’ मछली अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी धाक जमा रही है। राज्य के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की तीन सहकारी समितियों ने राज्य सरकार के सहयोग से नेपाल को 5 मीट्रिक टन मछलियों की पहली सफल खेप निर्यात की है। आगामी समय में राज्य से करीब 30 टन और मछलियों को विदेशों में भेजने की तैयारी चल रही है।

कैबिनेट और मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने देहरादून में आयोजित एक प्रेसवार्ता में इस उपलब्धि की जानकारी दी।

सीमांत क्षेत्र के मत्स्य पालकों को मिला बड़ा मुनाफा

मत्स्य मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि पिथौरागढ़ के धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र की तीन मत्स्य जीवी सहकारी समितियों ने यह ट्राउट मछलियां तैयार की थीं। इस पहले अंतरराष्ट्रीय निर्यात से क्षेत्र के 33 मत्स्य पालकों को लगभग ₹23.50 लाख की सीधी आय हुई है। इस पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, बेहतर पैकेजिंग और परिवहन के लिए ₹5.40 लाख की ‘गैप फंडिंग’ सहायता भी प्रदान की।

ग्लोबल मार्केट पर नजर: चमोली, पिथौरागढ़ और सितारगंज में लगेंगी प्रोसेसिंग यूनिट

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि दुबई में आयोजित ‘गल्फ फूड एक्सपो’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से मिले सकारात्मक फीडबैक के बाद अब विभाग यूरोप, मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में निर्यात की संभावनाओं पर तेजी से काम कर रहा है।

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए चमोली, पिथौरागढ़ और सितारगंज के एक्वा फार्म में आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट तैयार की जा रही हैं। यहां मछलियों की वैज्ञानिक तरीके से सफाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैकेजिंग की जाएगी। सितारगंज में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा भी विकसित की जा रही है, जिससे मत्स्य पालकों को उचित दाम मिलने तक मछली स्टोर करने का विकल्प मिलेगा।

आईटीबीपी के साथ समझौता और बढ़ता मत्स्य क्षेत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए मत्स्य मंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुले हैं। वर्ष 2024 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के साथ किए गए समझौते के तहत अब तक जवानों के लिए ₹2.10 करोड़ मूल्य की ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है।

विभाग के कुछ प्रमुख आंकड़े:

  • मत्स्य पालकों की संख्या: वर्ष 2022 में जहां राज्य में मात्र 10,011 मत्स्य पालक थे, वह संख्या अब बढ़कर 15,657 हो गई है (जिसमें 3,584 महिला मत्स्य पालक शामिल हैं)।
  • उत्पादन वृद्धि दर: वर्ष 2012-17 के दौरान जो मत्स्य उत्पादन वृद्धि दर मात्र 2 प्रतिशत थी, वह 2022-26 के बीच बढ़कर 11 प्रतिशत हो गई है।
  • उत्पादन का मूल्य: वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य में लगभग 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ है, जिसका बाजार मूल्य करीब ₹165 करोड़ आंका गया है।

इस प्रेसवार्ता के दौरान मत्स्य विभाग के निदेशक चंद्र सिंह धर्मशक्तू भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि ‘नवीन ट्राउट प्रोत्साहन योजना’ और ‘मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ के धरातल पर आने से प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार को नया बल मिला है।

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