Dharam Jyotish

नवरात्रि में भूलकर भी न चढ़ाएं माता रानी को ये फल, जानें भोग से जुड़े बेहद जरूरी नियम

नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की भक्ति और उपासना का विशेष समय होता है। इन नौ दिनों में भक्तजन माता को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित करते हैं, जिनमें फलों का विशेष महत्व होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ फल ऐसे भी हैं जिन्हें देवी को अर्पित करना वर्जित माना गया है? जी हां, गलत फलों का भोग लगाने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और माता रानी रुष्ट भी हो सकती हैं। आइए, यहां जानते हैं भोग से संबंधित जरूरी नियम और उन फलों के बारे में जो माता को नहीं चढ़ाने चाहिए।

ये फल माता रानी को भूलकर भी न चढ़ाएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष प्रकार के फलों को देवी दुर्गा की पूजा में शामिल नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ये फल या तो तामसिक प्रकृति के होते हैं या फिर उनका संबंध सात्विक पूजा से नहीं होता।

  • खट्टे फल: माता रानी को भोग में अत्यधिक खट्टे फल जैसे नींबू, करौंदा और इमली अर्पित नहीं करने चाहिए। नींबू का प्रयोग अक्सर तांत्रिक पूजा में होता है, इसलिए इसे सात्विक पूजा में वर्जित माना गया है।
  • तामसिक फल: अंजीर को तामसिक फल की श्रेणी में रखा गया है, जिस कारण इसे देवी को अर्पित नहीं किया जाता है।
  • बासी और कटे हुए फल: देवी-देवताओं को हमेशा ताजे और साबुत फल ही चढ़ाने चाहिए। बासी, सड़े-गले या कटे हुए फल पूजा में इस्तेमाल करना अशुभ माना जाता है और इससे माता के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है।
  • सूखा नारियल: माता को पानी वाला नारियल चढ़ाना शुभ माना जाता है, लेकिन सूखा नारियल अर्पित नहीं करना चाहिए।

भोग से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण नियम

फलों के अलावा भी भोग तैयार करने और अर्पित करने के कुछ विशेष नियम हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है, ताकि आपकी पूजा सफल हो सके।

  • सात्विकता का ध्यान: नवरात्रि के दौरान घर में तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है। इसलिए, माता के लिए जो भी भोग बनाएं, वह पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए।
  • स्वच्छता: भोग बनाने और चढ़ाने से पहले स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके ही प्रसाद तैयार करें।
  • शुद्ध घी का प्रयोग: माता के लिए प्रसाद बनाते समय शुद्ध देसी घी का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
  • तुलसी दल न चढ़ाएं: भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, लेकिन मां दुर्गा की पूजा में तुलसी के पत्ते का प्रयोग वर्जित माना गया है।

नवरात्रि के नौ दिन, ये लगाएं भोग

हर दिन मां दुर्गा के एक विशेष स्वरूप की पूजा की जाती है और उन्हें उनका प्रिय भोग अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • पहला दिन (मां शैलपुत्री): गाय के घी या घी से बने पदार्थों का भोग लगाएं।
  • दूसरा दिन (मां ब्रह्मचारिणी): शक्कर, पंचामृत और फलों का भोग अर्पित करें।
  • तीसरा दिन (मां चंद्रघंटा): दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाएं।
  • चौथा दिन (मां कुष्मांडा): मालपुए का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
  • पांचवां दिन (मां स्कंदमाता): केले का भोग लगाएं।
  • छठवां दिन (मां कात्यायनी): शहद का भोग लगाना उत्तम माना गया है।
  • सातवां दिन (मां कालरात्रि): गुड़ से बने नैवेद्य का भोग लगाएं।
  • आठवां दिन (मां महागौरी): नारियल का भोग अर्पित करें।
  • नौवां दिन (मां सिद्धिदात्री): तिल, हलवा, पूड़ी और चने का भोग लगाएं।

इस नवरात्रि इन नियमों का पालन कर विधि-विधान से माता रानी की पूजा करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

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