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पृथ्वी दिवस: वक्त आ गया है, हम धरती का कर्ज उतारें

सुनीत द्विवेदी, देहरादून।
पूरी दुनिया में पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को मनाया जाएगा। 1970 से 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व पृथ्वी दिवस का अपना सामाजिक तथा राजनीतिक महत्व है। ये दिवस अमेरिकी सीनेटर गेलार्ड नेल्सन की सोच का परिणाम है। जिन्होंने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नई राह खोलने की कोशिश की।

हर साल पृथ्वी दिवस की अलग थीम होती है। इस साल की थीम, ” ग्रह बनाम प्लास्टिक ” है। जो एक महत्वपूर्ण चुनौती को हमारे सामने लाता है। प्लास्टिक प्रदूषण हमारे ग्रह का दम घोंट रहा है। प्रतिवर्ष आठ मिलियन टन से अधिक प्लास्टिक महासागरों में फेंका जा रहा है। EARTHDAY.ORG ने 2040 तक प्लास्टिक उत्पादन में 60% की कटौती की वकालत की है। जो हमारे अस्तित्व और तमाम पारिस्थितिक तंत्रों की भलाई के लिए जरूरी है।

प्लास्टिक कई खतरे पैदा करता है। हमारी खाद्य श्रृंखलाओं में वो घुस चुका है। माइक्रोप्लास्टिक से लेकर महासागरों और परिदृश्यों को अपवित्र करने वाले गैर-बायोडिग्रेडेबल मलबे तक इसका प्रभाव है। इसीलिए यह संकट वैश्विक प्रतिक्रिया की मांग करता है। जिससे प्लास्टिक के उत्पादन, उपभोग और सोच में बदलाव ला सकें।

प्लास्टिक प्रदूषण पृथ्वी के वातावरण को नष्ट कर रहा है। प्लास्टिक सस्ता और टिकाऊ होता है। जिसकी वजह से लोग इसका ज्यादा उपयोग करते हैं।
प्लास्टिक प्रदूषण भूमि, जलमार्ग और महासागरों को प्रभावित कर रहा है । एक अनुमान के मुताबिक हर साल 1.1 से 8.8 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में जा रहा है। 2013 के अंत तक दुनिया भर से महासागर में 86 मिलियन टन प्लास्टिक समुद्री मलबे का भंडार था। 1950 से 2013 तक उत्पादित वैश्विक प्लास्टिक का 1.4% महासागर में जा चुका है। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि 2050 तक समुद्रों में वजन के हिसाब से मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक हो सकती है।

वैसे तो हमें हर दिन पृथ्वी दिवस मनाना चाहिए। अर्थात उसके संरक्षण के लिए कुछ न कुछ प्रयास करते रहना चाहिए। अगर इंसान सिर्फ विश्व पृथ्वी दिवस के दिन ही थोड़ा सा योगदान दे तो धरती के कर्ज को उतारा जा सकता है।

ये भी अजीब विडंबना है। पूरी दुनिया में 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस अब औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं है।  

अब वक्त आ गया है। हम प्लास्टिक के साथ हमारे रिश्ते को फिर से परिभाषित करें। क्योंकि, बगैर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर ठोस पहल के बिना कुछ नहीं हो सकता है। उम्मीद है प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ पूरी दुनिया एकजुट होगी। जंग लड़ेगी और जीतेगी भी।

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