मुखबा (उत्तरकाशी) | चारधाम यात्रा के पावन अवसर पर शनिवार को मां गंगा की भोगमूर्ति विग्रह डोली अपने शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव से गंगोत्री धाम के लिए रवाना हो गई। आर्मी बैंड की धुनों और ‘जय मां गंगे’ के उद्घोष के बीच दोपहर 12:15 बजे अभिजीत मुहूर्त में डोली ने प्रस्थान किया। इस दौरान अपनी धियाण (बेटी) स्वरूपा गंगा को विदा करते समय ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।
खबर के मुख्य बिंदु:
मुखबा गांव के ग्रामीणों के लिए यह दिन बेहद भावुक होता है। ग्रामीण मां गंगा को अपनी बेटी की तरह मानते हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल ने बताया कि परंपरा के अनुसार, ग्रामीणों ने गंगा को स्थानीय फसल ‘फाफरे’ का भोग लगाया। साथ ही, अगले छह महीने के प्रवास के लिए ‘कल्यो’ (कंडा और अर्से) भेंट किया। इस विशेष अवसर के लिए देश-विदेश में रह रहे गांव के लोग भी मुखबा पहुंचे हैं।
आर्मी बैंड और ढोल-दमांऊ की अगुवाई में डोली तीर्थ पुरोहितों और सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ मुखबा से जांगला के 7 किलोमीटर लंबे जोखिम भरे मार्ग से होते हुए भैरो घाटी पहुंचेगी। शनिवार की रात डोली भैरो मंदिर में ही विश्राम करेगी।
रविवार सुबह डोली भैरो घाटी से गंगोत्री धाम के लिए रवाना होगी। धाम पहुंचने के बाद विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर मंदिर के कपाट अगले छह माह के लिए खोल दिए जाएंगे।
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