देहरादून, । उत्तराखंड में मानसून की मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी जनपदों तक बारिश का कहर साफ तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि रविवार को बारिश की रफ्तार थोड़ी धीमी रही, लेकिन पिछले दिनों हुई भारी वर्षा के कारण हालात अभी भी गंभीर और चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। कई प्रमुख चारधाम यात्रा मार्ग और दर्जनों ग्रामीण सड़कें भूस्खलन के कारण बाधित हैं, जबकि नदी-नाले उफान पर हैं।
मौसम विभाग ने सोमवार (13 जुलाई) को राज्य के पांच जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है और अगले पांच दिनों तक कई क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए लोगों से बेहद सतर्क रहने की अपील की है।
इस समय मानसून का सबसे गंभीर असर उत्तरकाशी जिले में देखने को मिल रहा है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) उत्तरकाशी के स्यानाचट्टी क्षेत्र में पहाड़ी से लगातार मलबा और भारी बोल्डर गिरने के कारण तीसरे दिन भी यातायात के लिए नहीं खोला जा सका है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और स्थानीय प्रशासन की टीमें भारी मशीनों के साथ सड़क से मलबा हटाने और वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही हैं।
यमुनोत्री हाईवे पर स्यानाचट्टी के पास पहाड़ी नाले (कुपड़ा गाड़/गढ़गाड़) से आए भारी मलबे के चलते यमुना नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है। इसके कारण नदी में दोबारा से कृत्रिम झील बनने की गंभीर स्थिति पैदा होने लगी है, जिससे किनारे स्थित होटलों, होमस्टे और रिहायशी इमारतों के डूबने का खतरा बढ़ गया है।
इस खतरे को टालने और पानी के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से नदी के चैनलाइजेशन (Channelling) का कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है।
राजधानी देहरादून में रविवार को बादलों और धूप की आंख मिचौली जारी रही। बारिश न होने के कारण दिन में उमस काफी बढ़ गई, हालांकि समय-समय पर चली ठंडी हवाओं ने थोड़ी राहत दी।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आज (सोमवार) देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक और तीव्र बौछारों के साथ भारी बारिश होने की संभावना है, जिसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
आपदा प्रबंधन विभाग और प्रशासन ने यात्रियों तथा स्थानीय निवासियों से अनुरोध किया है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। विशेषकर नदी तटों, संवेदनशील ढलानों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास जाने से पूरी तरह बचें और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों के संपर्क में रहें।
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