नई दिल्ली (धर्म डेस्क): रंगों के त्योहार होली से ठीक आठ दिन पहले की अवधि को हिंदू धर्म में ‘होलाष्टक’ कहा जाता है। आज यानी 24 फरवरी 2026 से होलाष्टक की शुरुआत हो गई है, जो 3 मार्च (होलिका दहन) तक जारी रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्यों को करना वर्जित माना जाता है।
यद्यपि मांगलिक कार्यों के लिए यह समय शुभ नहीं है, लेकिन आध्यात्मिक और साधना की दृष्टि से इसे अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। आइए जानते हैं होलाष्टक से जुड़े जरूरी नियम और इसके पीछे की धार्मिक वजह।
होलाष्टक के दौरान ग्रहों का स्वभाव उग्र होता है, इसलिए शास्त्रों में निम्नलिखित कार्यों की मनाही है:
भले ही शुभ कार्य वर्जित हों, लेकिन पूजा-पाठ के लिए यह समय ‘सिद्ध’ माना जाता है:
इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए गए हैं:
होलाष्टक का समय संयम और साधना का है। यदि आप इन 8 दिनों में नियमों का पालन करते हुए पूजा-पाठ और दान करते हैं, तो यह मानसिक शांति और आगामी त्योहार ‘होली’ के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
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