UTTARAKHAND

उत्तराखंड में बुजुर्ग महिलाओं की स्थिति पर चौंकाने वाला खुलासा: 1.34 लाख को है सरकारी मदद की दरकार, 33 हजार को नहीं मिलती कोई पेंशन

देहरादून। उत्तराखंड में बुजुर्ग महिलाओं की स्थिति को लेकर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा कराए गए एक सर्वे में बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की 1 लाख 34 हजार से अधिक बुजुर्ग महिलाओं को जीवन के इस पड़ाव पर सरकारी सहायता की सख्त जरूरत है। इनमें से बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक तंगी, असुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जीवन व्यतीत कर रही हैं।

आंकड़ों की जुबानी: आर्थिक मदद और स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती
विभाग द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कराए गए इस सर्वे में महिलाओं की अलग-अलग आवश्यकताओं को रेखांकित किया गया है:

  • आर्थिक सहायता: सबसे अधिक 61,258 महिलाओं ने आर्थिक मदद की जरूरत बताई है।
  • स्वास्थ्य एवं दवाएं: 23,643 बुजुर्ग महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और दवाओं की आवश्यकता है।
  • पोषाहार और भोजन: 27,125 महिलाओं को पोषाहार और 11,960 को खाद्य सामग्री की दरकार है।
  • सुरक्षा और आवास: 4,330 महिलाओं ने सुरक्षा की चिंता जताई है, जबकि 6,474 महिलाओं के पास रहने को सुरक्षित छत (आवास) नहीं है।

पेंशन का हाल: 33,722 महिलाएं लाभ से वंचित
सर्वे रिपोर्ट का एक और चिंताजनक पहलू यह है कि प्रदेश की 33,722 बुजुर्ग महिलाएं किसी भी प्रकार की सरकारी पेंशन का लाभ नहीं ले पा रही हैं। वर्तमान में पेंशन पा रही महिलाओं का विवरण इस प्रकार है:

  • वृद्धावस्था पेंशन: 71,397 महिलाएं
  • विधवा पेंशन: 27,896 महिलाएं
  • दिव्यांग पेंशन: 1,339 महिलाएं
  • परित्यक्ता पेंशन: 456 महिलाएं

सर्वे के आधार पर तैयार होगी भविष्य की रणनीति
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से कराए गए इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं की पहचान करना था। अब इन आंकड़ों के आधार पर विभाग इन महिलाओं को संबंधित सरकारी योजनाओं से जोड़ने का काम करेगा, ताकि उन्हें सुरक्षा, स्वास्थ्य, पोषाहार और आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जा सके।

विभागीय मंत्री का कथन:

“प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह सर्वे कराया गया था। इसके आधार पर बुजुर्ग महिलाओं की वास्तविक जरूरतों की पहचान हुई है। अब उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए सरकार आवश्यक कदम उठाएगी और उन्हें सीधे योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।”— रेखा आर्या, मंत्री, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग


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