देहरादून। उत्तराखंड में बुजुर्ग महिलाओं की स्थिति को लेकर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा कराए गए एक सर्वे में बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की 1 लाख 34 हजार से अधिक बुजुर्ग महिलाओं को जीवन के इस पड़ाव पर सरकारी सहायता की सख्त जरूरत है। इनमें से बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक तंगी, असुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जीवन व्यतीत कर रही हैं।
आंकड़ों की जुबानी: आर्थिक मदद और स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती
विभाग द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कराए गए इस सर्वे में महिलाओं की अलग-अलग आवश्यकताओं को रेखांकित किया गया है:
पेंशन का हाल: 33,722 महिलाएं लाभ से वंचित
सर्वे रिपोर्ट का एक और चिंताजनक पहलू यह है कि प्रदेश की 33,722 बुजुर्ग महिलाएं किसी भी प्रकार की सरकारी पेंशन का लाभ नहीं ले पा रही हैं। वर्तमान में पेंशन पा रही महिलाओं का विवरण इस प्रकार है:
सर्वे के आधार पर तैयार होगी भविष्य की रणनीति
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से कराए गए इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं की पहचान करना था। अब इन आंकड़ों के आधार पर विभाग इन महिलाओं को संबंधित सरकारी योजनाओं से जोड़ने का काम करेगा, ताकि उन्हें सुरक्षा, स्वास्थ्य, पोषाहार और आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जा सके।
विभागीय मंत्री का कथन:
“प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह सर्वे कराया गया था। इसके आधार पर बुजुर्ग महिलाओं की वास्तविक जरूरतों की पहचान हुई है। अब उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए सरकार आवश्यक कदम उठाएगी और उन्हें सीधे योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।”— रेखा आर्या, मंत्री, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग
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