UTTARAKHAND

6 साल बाद लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू: गुंजी में खुला कस्टम कार्यालय, व्यापारियों में खुशी की लहर

भारत-चीन व्यापार के लिए गुंजी में खुला ऑफिस

पिथौरागढ़ (उत्तराखंड): उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित ऐतिहासिक लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा व्यापार आखिरकार छह वर्ष के लंबे अंतराल के बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। सीमांत क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में समुद्र तल से करीब 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित गुंजी में कस्टम कार्यालय (सीमा शुल्क कार्यालय) खोल दिया गया है, जहां कस्टम अधिकारी व्यापारियों के सामान की जांच करेंगे।

एसबीआई की अस्थायी शाखा और व्यापारियों को परमिट

व्यापार के दौरान व्यापारियों को सुरक्षित वित्तीय लेनदेन और बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जल्द ही गुंजी में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक अस्थायी शाखा भी अपना कामकाज शुरू कर देगी।

पिथौरागढ़ जिला प्रशासन द्वारा व्यापारियों और उनके सहायकों (हेल्पर्स) को परमिट जारी करने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। अब तक प्रशासन को कुल 134 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से जांच के बाद 73 परमिट जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा, सीमा मार्ग पर सामान ले जाने वाले पोनी-पोर्टर्स (घोड़े-खच्चर संचालकों) के लिए भी 7 पास जारी किए जा चुके हैं।

साल 2019 में बंद हुआ था व्यापार

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में कोरोना महामारी और सीमा पर उपजे तनाव के चलते यह पारंपरिक व्यापार बंद हो गया था। अब करीब छह वर्षों बाद इस मार्ग से व्यापार दोबारा बहाल होने जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से कुल 300 ट्रेड पास मंगाए हैं। इस मार्ग से भारतीय व्यापारी लिपुलेख दर्रे को पार कर चीन (तिब्बत) के तकलाकोट व्यापारिक मंडी पहुंचेंगे।

इन वस्तुओं का होगा आयात-निर्यात

दोनों देशों के बीच होने वाले इस पारंपरिक सीमांत व्यापार में मुख्य रूप से निम्नलिखित वस्तुओं का आदान-प्रदान किया जाएगा:

  • भारत से निर्यात होने वाला सामान: गुड़, मिश्री, तंबाकू, कॉस्मेटिक सामग्री, पीतल के बर्तन और अन्य घरेलू सामान।
  • चीन से आयात होने वाला सामान: कंबल, जैकेट, शॉल, याक की पूंछ (चंवर), जूते और विभिन्न प्रकार के ऊनी कपड़े।

2019 में हुआ था ₹3.15 करोड़ का व्यापार

व्यापार बंद होने से पहले, आखिरी बार वर्ष 2019 में कुल 265 भारतीय व्यापारियों को परमिट जारी किए गए थे। उस दौरान दोनों देशों के बीच कुल 3.15 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया था, जिसमें भारत द्वारा 1.90 करोड़ रुपये मूल्य का सामान आयात और 1.25 करोड़ रुपये का सामान चीन को निर्यात किया गया था।

पोनी-पोर्टर्स के लिए स्यांगचिम में बनेगा अस्थायी पड़ाव

व्यापारियों के भारी सामान को दुर्गम रास्तों और लिपुलेख दर्रे तक पहुंचाने वाले पोनी-पोर्टर्स के लिए ‘स्यांगचिम’ में एक अस्थायी पड़ाव स्थापित किया जाएगा। यह निर्णय स्थानीय प्रशासन, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और भारत-चीन व्यापार समिति की संयुक्त बैठक में लिया गया। स्यांगचिम क्षेत्र नाबीढांग से लगभग 4 किलोमीटर दूर हेलीपैड के समीप स्थित है, जहां से लिपुपास (दर्रे) की दूरी करीब 5 किलोमीटर रह जाती है। यह पड़ाव माल ढुलाई को सुगम बनाने में बेहद सहायक साबित होगा।

अधिकारी का वक्तव्य

“व्यापारी और हेल्पर श्रेणी में अब तक कुल 134 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 73 परमिट जारी किए जा चुके हैं और शेष आवेदनों की गंभीरता से जांच की जा रही है। इसके साथ ही, 7 पोनी-पोर्टर्स के पास भी जारी कर दिए गए हैं ताकि सामान की ढुलाई सुचारू रूप से शुरू की जा सके।”— आशीष जोशी, एसडीएम, धारचूला

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