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उत्तराखंड में आज से लागू हुई ‘वीबी जी राम जी’ योजना: मनरेगा की जगह अब साल में मिलेगा 125 दिन का रोजगार

देहरादून: उत्तराखंड में ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने और ग्रामीणों की आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आज (1 जुलाई) से राज्य में ‘विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ (वीबी जी राम जी) को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया गया है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को पूर्व में संचालित मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजना के स्थान पर लाया गया है।

अब साल में मिलेंगे 125 दिन का काम

इस नई योजना के तहत ग्रामीण श्रमिकों के लिए गारंटीकृत रोजगार के दिनों को बढ़ा दिया गया है। पूर्ववर्ती व्यवस्था के 100 दिनों के मुकाबले अब श्रमिकों को पूरे साल में कम से कम 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित कराया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक बदलाव को लेकर बीती 11 मई को ही आवश्यक दिशा-निर्देश और अधिसूचना जारी कर दी थी। इसी क्रम में उत्तराखंड सरकार ने भी बीते मंगलवार को योजना के क्रियान्वयन के संदर्भ में गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसकी औपचारिक शुरुआत कर दी है।

आपदा राहत और जल संरक्षण पर रहेगा विशेष ध्यान

‘वीबी जी राम जी’ योजना का दायरा मनरेगा की तुलना में काफी विस्तृत है। इसमें श्रमिकों को पारंपरिक ग्रामीण कार्यों के अलावा ग्रामीण आजीविका बढ़ाने वाले प्रकल्पों, पर्यावरण सुधार के लिए जल संरक्षण और पहाड़ी व संवेदनशील क्षेत्रों के अनुकूल आपदा राहत कार्यों में भी लगाया जा सकेगा।

श्रमिक कर सकेंगे 318 प्रकार के कामकाज

योजना के सुचारू संचालन के लिए कार्यों की एक विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है। इस नई योजना के अंतर्गत कुल 318 प्रकार के अलग-अलग कामकाज कराए जा सकेंगे[2]। इन कार्यों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

  • रिपेयर और मेंटेनेंस (मरम्मत एवं रखरखाव): ग्रामीण संपत्तियों के रखरखाव के लिए कुल 97 प्रकार के कार्य तय किए गए हैं।
  • ग्रामीण मूलभूत ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर): ग्रामीण ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए कुल 88 प्रकार के कार्य चिह्नित हैं। इनमें 52 कार्य नए निर्माण से संबंधित हैं और 36 पुनर्निर्माण श्रेणी के हैं ।
  • जल संरक्षण: जल स्रोतों को बचाने और संवर्धन के लिए सबसे अधिक 107 प्रकार के कार्यों को योजना में शामिल किया गया है।
  • ग्रामीण आजीविका: स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और आजीविका के अवसरों के लिए 86 प्रकार के कार्य निर्धारित किए गए हैं।
  • आपदा राहत: उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आपदा से निपटने और राहत कार्यों के लिए 37 प्रकार के कार्यों का प्रावधान किया गया है।

राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना के धरातल पर उतरने से ग्रामीण अंचलों में पलायन पर रोक लगेगी और बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।

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