देहरादून: उत्तराखंड में ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने और ग्रामीणों की आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आज (1 जुलाई) से राज्य में ‘विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ (वीबी जी राम जी) को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया गया है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को पूर्व में संचालित मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजना के स्थान पर लाया गया है।
इस नई योजना के तहत ग्रामीण श्रमिकों के लिए गारंटीकृत रोजगार के दिनों को बढ़ा दिया गया है। पूर्ववर्ती व्यवस्था के 100 दिनों के मुकाबले अब श्रमिकों को पूरे साल में कम से कम 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित कराया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक बदलाव को लेकर बीती 11 मई को ही आवश्यक दिशा-निर्देश और अधिसूचना जारी कर दी थी। इसी क्रम में उत्तराखंड सरकार ने भी बीते मंगलवार को योजना के क्रियान्वयन के संदर्भ में गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसकी औपचारिक शुरुआत कर दी है।
‘वीबी जी राम जी’ योजना का दायरा मनरेगा की तुलना में काफी विस्तृत है। इसमें श्रमिकों को पारंपरिक ग्रामीण कार्यों के अलावा ग्रामीण आजीविका बढ़ाने वाले प्रकल्पों, पर्यावरण सुधार के लिए जल संरक्षण और पहाड़ी व संवेदनशील क्षेत्रों के अनुकूल आपदा राहत कार्यों में भी लगाया जा सकेगा।
योजना के सुचारू संचालन के लिए कार्यों की एक विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है। इस नई योजना के अंतर्गत कुल 318 प्रकार के अलग-अलग कामकाज कराए जा सकेंगे[2]। इन कार्यों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना के धरातल पर उतरने से ग्रामीण अंचलों में पलायन पर रोक लगेगी और बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।
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