
- हरिद्वार से हुई देशव्यापी ट्रेनिंग की शुरुआत; दवा उद्योग को नए मानकों के लिए किया जा रहा तैयार
- उत्तराखंड का देश के कुल दवा निर्यात में है 20% योगदान, इसलिए यहीं से हुआ कार्यक्रम का आगाज
हरिद्वार। देश में बनने और बिकने वाली दवाइयों की शुद्धता, सुरक्षा और गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संस्था इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) द्वारा तैयार किए गए ‘IP 2026’ के नए मानक आगामी 1 जुलाई से देशभर में लागू होने जा रहे हैं।
इन नए नियमों को लेकर देश के दवा निर्माताओं (फार्मा इंडस्ट्री) को जागरूक करने का अभियान शुरू हो चुका है। इसकी शुरुआत उत्तराखंड के हरिद्वार से की गई है। बुधवार को हरिद्वार के सिडकुल स्थित एकम्स टाउनहॉल में ‘एसोसिएशन ऑफ देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज’ और ‘आईपीसी’ के संयुक्त तत्वावधान में एक वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों को नए तकनीकी मानकों की ट्रेनिंग दी गई।
जानिए, ‘IP 2026’ के लागू होने से क्या बदलेगा?
- दवाइयों में अशुद्धियां होंगी न्यूनतम: नए मानकों का मुख्य उद्देश्य दवाओं के उत्पादन के समय उसमें रहने वाली संभावित अशुद्धियों (impurities) को न्यूनतम स्तर पर लाना है। इससे मरीजों तक अधिक सुरक्षित और असरदार दवाएं पहुंच सकेंगी।
- सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य: 1 जुलाई से देश की सभी दवा निर्माता कंपनियों को इन नए और अपग्रेड मानकों व मोनोग्राफ (दवा बनाने के निर्धारित फॉमूर्ले) का सख्ती से पालन करना होगा।
- ग्लोबल मार्केट में बढ़ेगी साख: वैश्विक मानकों के अनुरूप दवाइयां तैयार होने से भारतीय दवाओं की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होगी।
हरिद्वार से ही क्यों हुई शुरुआत?
उत्तराखंड के ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह ने बताया कि भारत के कुल दवा निर्यात में उत्तराखंड की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है। राज्य के इस महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए ही इस प्रशिक्षण अभियान की शुरुआत हरिद्वार से की गई है, ताकि स्थानीय उद्योग समय रहते इन तकनीकी बदलावों को आसानी से अपना सकें।
आसान शब्दों में समझिए: क्या है IP 2026
- 10वां संस्करण: यह भारतीय भेषज संहिता (Indian Pharmacopoeia) का 10वां संस्करण है, जिसे आईपीसी ने तैयार किया है।
- लॉन्चिंग: इसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा बीती 2 जनवरी को दिल्ली में लॉन्च किया गया था।
- कानूनी मान्यता: यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत भारत में निर्मित होने वाली और बेची जाने वाली दवाओं के निर्माण, गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए एक आधिकारिक और कानूनी रूप से बाध्यकारी मानक दस्तावेज है।
जिम्मेदारी संभाल रहे दिग्गजों का क्या कहना है?
“केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा लॉन्च किए गए आईपी 2026 के नए मानक 1 जुलाई से देशभर में प्रभावी हो जाएंगे। सभी दवा निर्माताओं के लिए इन नए अपग्रेड मोनोग्राफ का पालन करना अनिवार्य होगा, जिससे भारतीय दवाओं की विश्वसनीयता को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती मिलेगी।”– डॉ. वी. कलेसेल्वन, निदेशक और वैज्ञानिक, आईपीसी
“हरिद्वार में इस संवादात्मक सत्र को आयोजित करने का उद्देश्य यही है कि दवा कंपनियों को नई व्यवस्था अपनाने में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों और संशयों का तुरंत समाधान किया जा सके, ताकि मरीजों को अधिक शुद्ध दवाएं मिलें।”– संदीप जैन, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज
