पुरी की रथ यात्रा में हर वर्ष भगवान जगन्नाथ का रथ भक्तजन अपने हाथों से खींचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं — एक बार ऐसा चमत्कार हुआ, जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया।
रथ यात्रा का शुभ दिन था। हजारों भक्त उमड़े थे। जयकारों की गूंज और मंत्रोच्चारण के बीच रस्सियां खींची गईं, लेकिन… रथ एक इंच भी नहीं हिला।
पुजारी व्याकुल हो उठे। भक्तों की आंखों में आंसू आ गए। किसी ने कहा — शायद किसी अपवित्र हाथ ने रथ को छू लिया है…
तभी, भीड़ में हलचल हुई। एक श्वेत हाथी — एकदम शांत, लेकिन तेज़ चाल से — रथ की ओर बढ़ा।
वो सीधे भगवान के रथ तक पहुँचा, अपनी सूंड से रस्सी को थामा… और जैसे ही उसने खींचा — रथ तेज़ी से चल पड़ा!
लोग स्तब्ध रह गए। भक्ति, श्रद्धा और चमत्कार का साक्षात दृश्य था।
कहा जाता है, जब मनुष्य अयोग्य हो जाते हैं, तो भगवान स्वयं योग्य साधन भेज देते हैं।
वो हाथी कोई साधारण जीव नहीं था — वो स्वयं गजेंद्र का रूप माना गया, जो अपने प्रभु को रथ यात्रा पर ले जाने आया था।
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