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केदारनाथ में ‘कैरी मी बैक’ पॉलिसी लागू: श्रद्धालु खुद वापस लाएंगे अपना सूखा कचरा, रुद्रप्रयाग प्रशासन की अनूठी पहल

  • संयुक्त प्रयास: हीलिंग हिमालयास फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल के साथ मिलकर नगर पंचायत केदारनाथ चलाएगी अभियान।
  • विशेष बैग: तीर्थयात्रियों को दिए जाएंगे 400 से 500 ग्राम क्षमता वाले खास कैरी बैग।

रुद्रप्रयाग/केदारनाथ।
विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है। हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी के बीच बसे इस पावन तीर्थस्थल को प्लास्टिक और सूखे कचरे से मुक्त रखने के उद्देश्य से ‘कैरी मी बैक पॉलिसी’ (Carry Me Back Policy) लागू की जा रही है।

जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा के मार्गदर्शन में यह अनूठी पहल नगर पंचायत केदारनाथ द्वारा हीलिंग हिमालयास फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से संचालित की जाएगी।

खबर के मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • स्वच्छता में जनसहभागिता: केदारनाथ पहुंचने वाले श्रद्धालु न केवल दर्शनार्थी रहेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के सक्रिय भागीदार भी बनेंगे।
  • गौरीकुंड में बनेगा संग्रहण केंद्र: यात्री केदारनाथ धाम से सूखा कचरा बैग में भरकर वापस गौरीकुंड लाएंगे, जहां इसे एकत्रित किया जाएगा।
  • वैज्ञानिक निस्तारण: एकत्रित किए गए कचरे का सुलभ इंटरनेशनल द्वारा वैज्ञानिक और पर्यावरणीय मानकों के अनुसार निस्तारण किया जाएगा।

क्यों पड़ी इस अनूठी नीति की जरूरत?

चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं[1]। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से वहां प्लास्टिक की बोतलें, पैकेजिंग सामग्री, रैपर और अन्य सूखा कूड़ा बड़ी मात्रा में इकट्ठा हो जाता है[1]।

समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ धाम की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस कचरे का समय पर और उचित तरीके से निस्तारण करना प्रशासन के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है[1]। इसी चुनौती का स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल समाधान निकालने के लिए ‘कैरी मी बैक पॉलिसी’ को धरातल पर उतारा जा रहा है[1]।


कैसे काम करेगी ‘कैरी मी बैक’ व्यवस्था?

नई व्यवस्था के तहत केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं को नगर पंचायत की ओर से लगभग 400 से 500 ग्राम क्षमता वाले विशेष बैग उपलब्ध कराए जाएंगे[1]।

  1. श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान अपने पास से निकलने वाले सूखे कचरे को इसी बैग में डालना होगा।
  2. केदारनाथ धाम में दर्शन करने के बाद श्रद्धालु खुद इस बैग को अपने साथ वापस गौरीकुंड तक लेकर आएंगे।
  3. इससे धाम क्षेत्र में कचरा जमा नहीं होगा और स्वच्छता व्यवस्था बनी रहेगी।

तीन संस्थाएं मिलकर संभालेंगी पूरी कमान

इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए तीन अलग-अलग स्तरों पर जिम्मेदारियां तय की गई हैं[1]:

  • हीलिंग हिमालयास फाउंडेशन: यह संस्था यात्रियों को विशेष कूड़ा बैग उपलब्ध कराने और गौरीकुंड में कचरा संग्रहण (कलेक्शन) केंद्रों की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी।
  • सुलभ इंटरनेशनल: गौरीकुंड में एकत्रित किए गए इस कचरे को उठाकर वैज्ञानिक और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित अंतिम निस्तारण की जिम्मेदारी सुलभ इंटरनेशनल की होगी।
  • नगर पंचायत केदारनाथ: नगर पंचायत इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी, प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का काम करेगी।

स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

उपजिलाधिकारी (SDM) ऊखीमठ एवं प्रभारी अधिकारी नगर पंचायत केदारनाथ के निर्देशन में संचालित यह अभियान केवल कूड़ा प्रबंधन तक सीमित नहीं है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं में पर्यावरणीय चेतना विकसित करना है। अधिकारी चाहते हैं कि बाबा केदार के दर्शन के साथ-साथ श्रद्धालु अपने साथ हिमालय की स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण का एक सकारात्मक संदेश भी लेकर लौटें।

डीएम विशाल मिश्रा की अपील

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा, “स्वच्छ केदारनाथ, सुरक्षित हिमालय और संरक्षित पर्यावरण का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब देश-विदेश से आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु अपनी जिम्मेदारी समझे और इस मुहिम का सक्रिय हिस्सा बने।” प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और यात्रा से जुड़े हितधारकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की अपील की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केदारनाथ धाम का यह ‘कैरी मी बैक’ मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे अन्य हिमालयी तीर्थस्थलों और पर्यटन क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकेगा, जिससे संवेदनशील पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

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